चंद्रशेखर हत्याकांड: शहाबुद्दीन पर सीबीआई जांच अधूरी

Image caption दिवंगत छात्र नेता चंद्रशेखर पर चर्चा

बिहार के सिवान ज़िले में बिंदुसर गांव स्थित पीपल के पेड़ के नीचे बैठे लोग चिंता में डूबे हैं. सभी खामोश हैं. बाहर से गांव आने वालों के लिए यह ख़ामोशी बेचैन करने वाली है.

यह गांव है जवहारलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष चंद्रशेखर का. सबसे पुराने इस पीपल के पेड़ के ठीक सामने उनके घर पर आज भी उनके नाम का बोर्ड लगा हुआ है.

लाल दरवाजे पर टंगा यह बोर्ड गांव के लोगों को उनकी याद दिलाता रहता है.

Image caption चंद्रशेखर का घर

घर के बाहर फाटक का लाल रंग भी मज़दूरों के उस आंदोलन की याद दिलाता है जो ज़मींदारों के ज़ुल्म से तंग आकर उनके संगठन यानी भाकपा (माले) ने लोगों को इकट्ठा कर शुरू किया था. गांव के चबूतरे का भी लाल रंग यहां के लोगों के राजनीतिक रुझान की तरफ इशारा करता है.

तो आखिर गांव में इतनी ख़ामोशी क्यों है ? मैंने चंद्रशेखर के चचेरे भाई पारसनाथ सिंह से पूछा. उन्होंने कहा, "जिस दिन से मोहम्मद शहाबुद्दीन को ज़मानत मिली है, गांव के लोग सूरज ढलते ढलते घरों को लौट आते हैं. लोगों में खौफ है, क्योंकि उनके लोग हमेशा यहाँ लोगों को डराते रहे हैं."

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Image caption मोहम्मद शहाबुद्दीन, पूर्व सांसद, राजद

साल 1997 में 31 मार्च को सिवान के जेपी चौक पर एक धरने के कार्यक्रम के दौरान चंद्रशेखर और भाकपा (माले) के एक दूसरे नेता की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में राजद नेता और पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन सहित पांच लोग अभियुक्त बनाए गए थे.

सुभाष सिंह कहते है कि जब शहाबुद्दीन सिवान में रहते हैं तो उन लोगों में डर ज़्यादा होता है, जिन लोगों ने उनसे हमेशा लोहा लिया है. उनका इशारा भाकपा (माले) के कार्यकर्ताओं की तरफ था.

Image caption सुभाष सिंह,

चंद्रशेखर हत्याकांड की जांच सीबीआई कर रही है और इस हत्याकांड में चार अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई जा चुकी है. लेकिन मोहम्मद शाहबुद्दीन की भूमिका को लेकर अब भी सीबीआई की जांच पूरी नहीं हुई है.

बिंदुसर के लोगों में इसी बात का रोष ज़्यादा है. उनका आरोप है कि जब और मामलों में सीबीआई तत्परता से जांच करती है और अपनी रिपोर्ट पेश करने में कोई कोताही नहीं करती, तो फिर चंद्रशेखर ह्त्याकाण्ड में ऐसी सुस्ती क्यों ?

भाकपा माले के ज़िला सचिव नईमुद्दीन अंसारी का कहना है कि जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, उनका संगठन उसी समय से सीबीआई जांच में तेज़ी लाने की मांग कर रहा है.

Image caption नईमुद्दीन अंसारी, ज़िला सचिव, भाकपा (माले)

उनका आरोप है कि सभी बड़े राजनीतिक दल अंदर अंदर 'मोहम्मद शहाबुद्दीन से मिले हुए हैं, चाहे वो कांग्रेस हो या भारतीय जनता पार्टी.

सीबीआई की जांच को लंबा खिंचता देख अब चंद्रशेखर के परिजन जाने माने वकील प्रशांत भूषण से मिलकर मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाने का अनुरोध करने का मन बना रहे हैं.

वे प्रशांत भूषण से मिलेंगे और उनसे कहेंगे कि जिस तरह उन्होंने चन्दा बाबू के बेटों की ह्त्या के मामले में शहाबुद्दीन की ज़मानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, वैसा इस मामले में भी करें.

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Image caption प्रशांत भूषण, वरिष्ठ वकील

वो उनसे चंद्रशेखर ह्त्याकांड में सीबीआई की जांच रिपोर्ट में देरी को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे.

चंद्रशेखर की ह्त्या को बीस साल होने को हैं. इसी साल चार अभियुक्तों को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई है.

चंद्रशेखर के रिश्तेदारों के लिए इंसाफ का इंतज़ार भी उम्र भर की सज़ा जैसा ही साबित हो रहा है.

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