ऊपर धधकती आग और धुआं, नीचे सालों से सुलगती आग

  • 22 सितंबर 2016
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Image caption झरिया में कोयले के भंडार होने का पता 18वीं सदी के अंत में चला. उसके बाद यहां प्राकृतिक संसाधनों का दोहन शुरु हुआ.

झारखंड के झरिया स्थित कोयला खदानों में लगी आग की तस्वीरों को दूसरा सालाना गेटी इमेजेज़ इंस्टाग्राम पुरस्कार मिला.

भारतीय फ़ोटोग्राफ़र रॉनी सेन को इन तस्वीरों के लिए 10,000 डॉलर का अनुदान भी मिलेगा.

रॉनी सेन ने उरुग्वे के क्रिश्चियन रॉड्रीग्ज़ और इथियोपिया के गिरमा बर्टा के साथ यह पुरस्कार जीता है.

सेन ने कहा, "झरिया के खदानों के अंदर यह आग सौ साल से भी ज़्यादा समय से जल रही है. यहां रहने वाले लोग जन्म से ही यह सब कुछ देख रहे हैं. लिहाज़ा, वे सब कुछ जानते हैं और यह उनकी ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है. "

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Image caption घर, मकान, स्कूल, मंदिर और दूसरी तमाम चीज़ें ज़मीन के नीचे धधकती आग में समा चुकी हैं
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Image caption ऊपर धधकती आग और धुआं, नीचे सालों से सुलगती आग
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Image caption आग की वजह से नष्ट हो चुके मंदिर का एक हिस्सा
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Image caption 19वीं सदी के शुरू होते होते पूरा प्राकृतिक संसाधन झरिया इलाक़े से निकाला जा चुका था.
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Image caption अधिकारी इस्तेमाल होने लायक़ कोयला किसी तरह खदान से निकालने की कोशिश में रहते हैं.
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Image caption ठेके पर काम करने वाले इस मज़दूर को पांच ट्रक कोयला लादने पर तक़रीबन 130 रुपए मिलते हैं
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Image caption तड़के इस खदान के अंदर घुसकर कोयला निकालने के काम में लग जाती हैं ये महिला मज़दूर
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Image caption खदान के अंदर से कोयला निकालने वाला कर्मचारी
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Image caption ये बच्चे माता पिता का इंतज़ार कर रहे हैं, जो खदान के अंदर से कोयला निकालते हैं

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