साधारण फोन से भी संभव है पैसों का लेन देन

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Image caption पैसों के लेनदेन में साधारण मोबाइल फ़ोन कितना कारगर?

क्या सामान्य फ़ोन से भी पैसे का लेनदेन किया जा सकता है? क्या इसके लिए हमेशा स्मार्टफ़ोन का होना ज़रूरी नहीं है? और कितना कारगर है यह तरीका?

बीते दिनों ख़ुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो प्रसारण 'मन की बात' में कहा था, "तकनीकी बढ़ने के साथ साथ पैसे के लेनदेन के लिए अब बड़े स्मार्टफ़ोन की ज़रूरत भी नहीं रही. सामान्य फ़ीचर वाले फ़ोन से भी पैसे का ट्रांसफ़र किया जा सकता है. धोबी, सब्जी बेचने वाले, दूध देने वाले, अख़बार के वेंडर, चाय या चना बेचने वाले इस सुविधा का बड़ी आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं. सभी बैंक इससे जुड़ गए हैं."

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तो कितना आसान है फ़ीचर फ़ोन की मदद से पैसे का लेनदेन?. असल में इसे यूएसएसडी यानी अनस्ट्रक्चर्ड सप्लीमेंट्री सर्विस डेटा कहते हैं. इसके तहत आपका फ़ोन नंबर आपके बैंक अकाउंट से जुड़ा होना चाहिए. इसके बाद कई चरणों में निर्देशों को मानते हुए डेटा भरना होता है.

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Image caption *99# डायल कर पैसे का लेनदेन करने में सहूलियत है?

सामान्य फ़ोन से भुगतान

1. सबसे पहले *99# डायल करें

2. अपने बैंक के संक्षिप्त नाम के पहले तीन अक्षर या आईएफ़एससी कोड के पहले चार अक्षर डालें.

3. फ़ंड 'ट्रांसफ़र-एमएमआईडी' ऑप्शन चुनें

5. जिसे भुगतान करना है, उसका मोबाइल फ़ोन नंबर और एमएमआईडी (मोबाइल मनी आईडेंटिफ़ायर) नंबर डालें

6. रकम लिखें

7. अब अपना एमपिन (मोबाइल पिन) डालें, स्पेस छोड़कर अपने अकाउंट नंबर के शुरुआती चार अंक डालें

इसके बाद क्लिक करते ही आपका पैसा ट्रांसफर हो जाएगा.

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Image caption कम पढ़े लिखे लोग आख़िर कैसे तमाम सवालों के जवाब फ़ोन पर टाइप करेंगे?

इसमें किसी तरह की चूक या इस दौरान अगर नेटवर्क चला गया तो भुगतान नहीं होगा. और ये सारे चरण फिर दोहराने होंगे.

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मुश्किल बस इतनी है कि अंग्रेज़ी न जानने वाले या तकनीकी से अनजान व्यक्ति को इसमें दिक़्क़त आ सकती है.

हालांकि प्रधानमंत्री की मानें तो यह सेवा कम पढ़े-लिखे की मदद के लिए है. मगर आईटी विशेषज्ञ प्रशांतो रॉय कहते हैं, "यह सिस्टम पूरी तरह टेक्स्ट आधारित है, जिसे कम नहीं किया जा सकता. इसलिए इसका इस्तेमाल अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे लोग तो कर ही नहीं सकते."

दूसरी परेशानी तकनीकी है. इसमें काफ़ी कम बैंडविड्थ रखा गया है ताकि यह सस्ता रहे.

प्रशांत के मुताबिक़, "इसका एक साथ कुछ हज़ार लोग ही इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर बड़ी तादाद में लोग यह सिस्टम खोलेंगे तो यह काम नहीं करेगा, क्योंकि उसके लिए ज़रूरी बैंडविड्थ नहीं है."

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गांवों में बैंडविड्थ की हालत यह है कि सामान्य बातचीत के दौरान भी कई बार फ़ोन का नेटवर्क चला जाता है और कई इलाक़ों में कई दिन तक नेटवर्क नहीं रहता. ऐसे में भला टेक्स्ट आधारित यह बैंकिंग प्रणाली कैसे चलेगी?

तो क्या फ़िलहाल यह सिस्टम कामयाब नहीं हो सकता? इस पर प्रशांतो का मानना है कि इसके बारे में बड़े पैमाने पर लोगों को शिक्षित करना होगा. साथ ही उनका साक्षर होना निहायत ज़रूरी है. उनके मुताबिक़ फ़िलहाल यह व्यस्था कारगर नहीं है.

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