सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद पशु व्यापार बहाल

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पशुओं के व्यापारियों और मांस के कारोबारियों को अब अगले महीने का इंतज़ार है जब केंद्र सरकार 'पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम (पशुधन बाज़ार का विनियमन) नियम- 1960' में संशोधन कर नया प्रारूप पेश करेगी.

इस अध्यादेश के बाद पशुओं के व्यापार से जुड़े लोगों ने पहले मद्रास उच्च न्यायलय का दरवाज़ा खटखटाया था, जिसके बाद इस अध्यादेश पर रोक लगा दी गई.

'पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम (पशुधन बाज़ार का विनियमन) नियम- 1960' में किए गए संशोधन को लेकर पूरे भारत में बीफ़ पर राजनीति गरमायी रही.

गाय के साथ भैंसें और ऊँट भी

कुछ राजनीतिक दलों का आरोप है कि 'बीफ़' की आड़ में भारतीय जनता पार्टी समाज में फूट डालने की कोशिश कर रही है.

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ब्रह्मपुत्र नदी के किनारे एक किसान की इस बात से गाय की तस्करी के स्तर का अंदाज़ा लगता है.

नए संशोधित अध्यादेश में पशुधन में गौवंश के साथ-साथ भैंसों और ऊँट को भी रखा गया है.

नए अध्यादेश के अनुसार अब किसान या व्यापारी किसी भी पशु को सीधे तौर पर 'स्लॉटर हाउस' में बेचने के बजाय उन्हें सरकार द्वारा चिन्हित या अधिघोषित मंडी में ही बेचे जाने का प्रावधान किया गया है.

यह भी कहा गया है कि जिनको भी पशु ख़रीदने हैं, उन्हें सीधे अधिघोषित मंडियों से ही खरीदना पड़ेगा.

इस अध्यादेश की वजह से किसान भी अपने पशु किसी को नहीं बेच पा रहे थे और ना ही किसी किसान से पशु खरीद पा रहे थे.

नए नियमों का बाज़ार पर असर

दिल्ली की ग़ाज़ीपुर मंडी में तैनात सरकारी प्रतिनिधि सेंथिल कुमार कहते हैं कि अध्यादेश के बाद पशु बाज़ार वीरान हो गए थे और पशु मेलों में भी सन्नाटा पसर गया था.

अब सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास उच्च न्यायलय द्वारा अध्यादेश पर लगाई गयी रोक को तीन महीनों तक के लिए बढ़ा दिया है.

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया है कि वो नए अध्यादेश में और भी संशोधन करने जा रही है और जल्द ही संशोधित अध्यादेश भी जारी कर दिया जाएगा.

आल इंडिया मीट एंड लाइवस्टॉक एसोसिएशन आफ इंडिया के फ़ौज़ान अल्वी का कहना है कि नए अध्यादेश में परिभाषित पशु की श्रेणी में भैंस को शामिल नहीं किया जाना चाहिए था.

इस मुद्दे को लेकर उनके संगठन ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन से बात की थी.

मंत्री ने संगठन के प्रतिनिधियों को आश्वासन दिया था कि वो जल्द ही अध्यादेश में संशोधन की प्रक्रिया शुरू करेंगे.

भारत सरकार के एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को भी ऐसा ही कहा. सरकारी वकील का कहना था कि संशोधित अध्यादेश अगस्त महीने तक जारी कर दिया जाएगा.

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