महंगाई दर शून्य से नीचे

महंगाई
Image caption थोक मूल्य घटे हैं लेकिन खुदरा भाव में ख़ास कमी नहीं आई है

भारत में महंगाई दर पिछले 30 साल में पहली बार शून्य से नीचे चली गई है हालांकि खाद्य सामग्रियों की क़ीमतें पिछले साल के मुक़ाबले ज़्यादा हुई हैं.

जून के पहले हफ़्ते की समाप्ति पर देश की मुद्रास्फीति शून्य से नीचे -1.61 तक चली गई है.

इस साल छह जून को समाप्त होने वाले हफ़्ते में थोक बिक्री का सूचकांक पिछले साल इसी हफ़्ते के मुक़ाबले 236.5 से घटकर 232.7 हो गया है.

भारत शायद पहली बड़ी अर्थव्यवस्था है जिसकी महंगाई दर 'नेगेटिव ज़ोन' में चली गई है यानी शून्य से नीचे हो गई है.

दुनिया भर में छाई आर्थिक मंदी के कारण यूरोपीय देशों की महंगाई दर शून्य के क़रीब है.

स्वागत

महंगाई दर में आने वाली कमी का शेयर बाज़ार ने स्वागत किया है और बाज़ार में तेज़ी आई है.

इस ख़बर के बाद मुंबई स्टॉक एक्सचेंज में सुबह से जारी गिरावट के बाद तेज़ी आई और सूचकांक में 200 अंकों का उछाल देखा गया.

बाज़ार विश्लेषकों का मानना है कि इससे आर्थिक नीति में नरमी आएगी और बैंकों की ब्याज दरों में कमी होगी.

थोक मूल्य का आँकड़ा जारी करते हुए सरकार ने कहा मुद्रास्फीति की वार्षिक दर छह जून को समाप्त हफ़्ते में -1.61 रही.

पिछले हफ़्ते यह दर 0.13 प्रतिशत थी जबकि पिछले साल इन्ही हफ़्तों में यह 11.66 प्रतिशत थी.

बहरहाल, खाद्य सामग्रियाँ पिछले साल के मुक़ाबले 8.7 प्रतिशत महंगी रहीं. दाल की क़ीमतें 17 प्रतिशत तक महंगी हुई हैं, अनाज 13.5 प्रतिशत जबकि फल और सब्ज़ियों की क़ीमत में 10 प्रतिशत की महंगाई आई है.

इस मुद्रास्फीति का कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के मूल्यों में आने वाली कमी है. इस समय एक बैरल तेल की क़ीमत 70 डॉलर है जबकी एक साल पहले इस समय इसकी क़ीमत 170 डॉलर प्रति बैरल थी.