क्या भारत में बढ़ेगा इंटरनेट का बाज़ार?

इंटरनेट
Image caption भारत में इंटरनेट उपभोक्ता तेजी से बढ़ रहे हैं

वत्सांक बख्शी एक छात्र हैं और मुंबई में रहते हैं. कुछ सुस्त और आलसी से. जो उठते भी तब है जब अलार्म की तेज़ आवाज़ उनके कानों में पड़े.

पर वत्सांक इस तरह की जीवनशैली के बावजूद कुछ ख़ास हैं क्योंकि उनपर भारतीय इंटरनेट कंपनियों की ख़ास नज़र है.

वे रोज इंटरनेट का प्रयोग करते हैं. वे नाश्ते से पहले ही लॉगऑन कर लेते हैं जब उनके मुँह में टूथपेस्ट का स्वाद ताज़ा बना रहता है.

बतशंक बख्शी कहते हैं, "मैं अपने दोस्तों और घरवालों से संपर्क बनाए रखने के लिए इंटरनेट का उपयोग करता हूँ. रात में मैं इंटरनेट पर गाने सुनता हूँ और गेम खेलता हूँ."

इंटरनेट और जीवन

सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों से होने वाला मनोरंजन उनके जीवन का एक हिस्सा है. वह कहते हैं," इंटरनेट मुझे पूरे दिन की योजना बनाने में मदद करता है, यह मेरे जीवन का हिस्सा बन गया है."

भारत की आधी से अधिक आबादी युवाओं की है जिनकी उम्र 25 साल से कम है. ये युवा आधुनिक प्रोद्यौगिकी में अपने हाथ आज़मा रहे हैं और वे उसके प्रयोग के लिए उत्सुक हैं.

इसलिए भारत को इंटरनेट कंपनियों के लिए भरपूर संभावनाओं वाले बाज़ार के रूप में देखा जाता है.

नौ फ़ीसदी की वार्षिक आर्थिक विकास दर ने रोज़गार के नए अवसर पैदा किए हैं और लोगों की पैसे खर्च करने की क्षमता भी बढ़ाई है.

इस साल विकास की रफ़्तार कम रहने के बाद भी ज़रूरत इस बात की है कि सामाजिक और गाँवों के लिए बनने वाली योजनाओं को और धन दिया जाए जिससे ग़रीबों के हाथों में भी पैसा पहुँच सके और वे उपभोक्ता बन सकें.

आज भारत की कई बड़ी कंपनियाँ दुनिया के सूचना प्रौद्योगिकी बाज़ार में अपना विस्तार कर रही है और उनके कार्यकारी अधिकारी प्रभावशाली बनते जा रहे हैं.

इंटरनेट और मोबाइल

इस समय हर 10 में से एक भारतीय या 10 करोड़ लोग नियमित रूप से इंटरनेट का उपयोग करते हैं.

अगर हम भारत के 35 करोड़ कनेक्शन वाले मोबाइल फ़ोन बाज़ार से तुलना करें तो यह बहुत साफ़ है कि इंटरनेट को संतृप्तता की अवस्था को प्राप्त करने में काफ़ी लंबा रास्ता तय करना पड़ेगा.

भारत में इंटरनेट सुविधाओं के विस्तार के लिए कंपनियों को सबसे अधिक बुनियादी सुविधाओं के अभाव का सामना करना पड़ता है.

शहरों में बिछे फ़ोन के तार या तो काफ़ी पुराने हैं या काफ़ी ख़राब हालत में हैं.

आज भारत में जो लोग इंटरनेट का उपयोग करते हैं उनमें से अधिकतर शहरी युवा हैं. अन्य सैकड़ों-लाखों भारतीयों के लिए अभी भी इंटरनेट का अस्तित्व न के बराबर है.

सरकार ने इसकी पहचान एक प्रमुख समस्या के रूप में की है जिसका समाधान ज़रूरी है. सरकार की इंटरनेट के लिए बुनियादी सुविधाओं के सुधार पर बड़े पैमाने पर पैसे खर्च करने की योजना है.

किसी भी तरह के सुधार में अभी काफ़ी समय लगेगा लेकिन रिलायंस कम्युनिकेशन एक ऐसी कंपनी है जो और इंतज़ार करने को तैयार नहीं है.

रिलायंस कम्युनिकेशन और उसकी कुछ प्रतिद्वंदी कंपनियों ने देश के दूर दराज के इलाक़ों को वायरलेस नेटवर्क से जोड़ने की योजना बनाई है.

आर्थिक मंदी का पहलू

कंपनी के अध्यक्ष महेश प्रसाद कहते हैं, "वायरलेस होते ही कंपनी की पहुँच देश के 98 फ़ीसदी हिस्से तक हो जाएगी और इसकी क़ीमत भी अधिकांस भारतीयों की पहुँच में होगी."

देश में इंटरनेट का उपयोग करने वालों के अनुभव वैसे ही हैं जैसा कि मुंबई के एक इंटरनेट कैफ़े का इस्तेमाल करने वालों के हैं.

एक रेलवे स्टेशन के पास की एक भीड़भाड़ वाली सड़क के किनारे बने इंटरनेट कैफ़े बहुत ठीक हालत में नहीं है.

यहाँ नियमित रूप से आने वालों में छात्र, व्यापारी और कुछ ऐसे लोग हैं जो कभी-कभार इंटरनेट का उपयोग करते हैं. वे अपने घर पर इंटरनेट कनेक्शन तो ले सकते हैं लेकिन वे इसके बारे में नहीं सोचते हैं.

कैफ़े के मालिक मक़सूद बट की शिकायत हैं कि आर्थिक मंदी ने उनका जीवन कठिन बना दिया है क्योंकि उनके ग्राहक इंटरनेट पर कम समय खर्च करने लगे हैं.