बजट: आपके सवाल और जवाब

सभा में भारत का आम बजट पेश करते हुए भारत के वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अर्थव्यवस्था की विकास दर नौ फ़ीसदी तक ले जाने को प्राथमिकता बताया है.

उन्होंने बताया कि वर्ष 2008-09 में आर्थिक विकास दर 6.7 फ़ीसदी रही. उन्होंने अनेक अन्य घोषणाएँ भी की हैं. अपके विचार में वर्ष 2009-10 का बजट आम आदमी के लिए कितना लाभदायक साबित होगा? क्या ये बजट आपकी उम्मीदों पर खरा उतरा है?

आप इस बजट से संबंधित अपने विचार, सवाल या फिर आशंकाएँ ई-मेल के ज़रिए hindi.letters@bbc.co.uk - पर हमें लिख भेजें.

आपके सवालों के जवाब दिए डॉक्टर भरत झुनझुनवाला ने.

डॉक्टर भरत झुनझुनवाला भारतीय प्रबंधन संस्थान, बंगलौर में प्रोफ़ेसर रह चुके हैं. अमरीका के फ़्लोरिडा विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पीएचडी करने वाले भरत झुनझुनवाला आर्थिक और सामाजिक विषयों पर अनेक किताबें भी लिख चुके हैं.

अपने सवाल और डॉक्टर झुनझुनवाला के जवाब यहाँ पढ़ें:

इस बजट के अनुसार नौकरी करने वालों को कर में कितनी छूट मिलेगी?एएस गुप्ता.

सभी करदाताओं के लिए बेसिक छूट एक लाख 50 हज़ार रुपए से बढ़ाकर एक लाख 60 हज़ार कर दी गई है. आयकर पर लगने वाले दस प्रतिशत सरचार्ज को हटा दिया गया है.

बजट में मंदी का प्रभाव कितना नज़र आ रहा है और कहाँ?डॉ. अमिता नीरव, इंदौर.

बजट में मंदी को तोड़ने के लिए वित्तीय घाटे को नियंत्रित करने के लक्ष्य को त्याग दिया गया है. सरकार नोट छापकर बुनियादी संरचना में निवेश करेगी जिससे घरेलू बाज़ार में सीमेंट स्टील और श्रम की माँग बढ़ेगी और मंदी को तोड़ने में मदद मिलेगी.

बजट आम लोगों के लिए कितना फ़ायदेमंद रहेगा? क्या महँगाई परलग़ाम लग पाएगी?गौरव कुमार

आम आदमी को रोज़गार गारंटी योजना में विस्तार और 25 किलो अनाज तीन रुपए प्रति किलो में उपलब्ध होने से राहत मिलेगी. किसानों और छौटे उद्योगों को सस्ता क़र्ज़ मिलने से कुछ राहत मिलेगी. लोकिन छोटे उद्योगों के ज़रिए बनाए गए माल को बड़े उद्योगों से संरक्षण न देने से इस क़दम की सार्थकता संदिग्ध रहेगी.

वर्तमान में महँगाई की दर न्यून हो चुकी है क्योंकि निर्यातों के दबाव में होने से अर्थव्यवस्था में कुछ सुस्ती है. आने वाले समय में निर्यातों के दोबारा स्थिर होने और बढ़ते हुए वित्तीय घाटे के दबाव के कारण महँगाई में तीव्र वृद्धि होने की संभावना है.

भारत एक कृषि प्रधान देश है. इस संदर्भ में क्या इस बजट पर आपकोंभरोसा है. क्या कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए पर्याप्त कदम उठाए गएहैं?सुहैल अहमद

कृषि के लिए मुख्यत: सस्ता क़र्ज़ उपलब्ध कराने की योजना है. मेरे आकलन में इससे किसानों को विशेष लाभ नहीं होगा. उनकी मुख्य ज़रूरत कृषि उत्पादों के मूल्यों में बढ़त है. इस दिशा में उन्हें राहत देने के लिए कोई क़दम नहीं उठाया गया है.

हमें यह जानना है कि क्या इस बजट में किसी एनआरआई के ज़रिए भारतपैसा भेजने पर कोई कर लगाया गया है?वसीम, गुजरात

बजट में एनआरआई के ज़रिए पैसा भेजने पर कोई कर नहीं लगाया गया है.

आम बजट बिलकुल ढीला-ढाला है. इसमें ऐसी कोई बात नहीं जो आम जनता के चेहरे पर मुस्कान लाए. टैक्स में कटौती यानी फिर से अमीरों को फ़ायदा पहुँचाने का काम किया गया है. ग़रीबों के लिए कुछ भी नहीं है.सेहर अंजुम

ऋण से आम आदमी को राहत अवश्य मिलेगी. समस्या परावलंबन की है. ये सभी राहत को पाने के लिए आम आदमी को सरकार के ज़रिए भिक्षा मांगनी पड़ती है जो कि उसके आत्म स्वाभिमान को आहत करता है. सरकार को चाहिए था कि आम आदमी को बाज़ार में रोज़गार मिल सकता इसकी व्यवस्था करती. लेकिन सरकार चाहती है कि देश को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में जीतने के लिए सक्षम बनाया जाए.

यह कार्य अमीरों के ज़िरए लगाए गए उद्योगों से ही सम्भव है. इसलिए चुनिंदा उद्योगों जैसे पावरलूम पर प्रतिबंध लगाकर आम आदमी के लिए रोज़गार बनाने चाहिए थे. इन चुनिंदा क्षेत्रों को छोड़ शेष को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में झोंक देना चाहिए. ग़लती यह है कि श्रम सघन चुनिंदा उद्योगों को संरक्षण नहीं दिया गया है.

क्या सरकार की शहरों और गांवों के प्रति भेदभावपूर्ण नीति से हमारीसामाजिक समता में गहरा अंतर आता दिख रहा है ?अमित, बंगलूरु

गाँव की समस्या कृषि में निहित है. एक एकड़ भूमि से होने वाले उत्पादन की सीमा है जबकि एक शहरी बिल्डिंग से करोड़ों रुपए का सॉफ़्टवेयर बन सकता है. मेरी समझ से सरकार को ग्रामीण युवकों को शहरी सेवा क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहन देना चाहिए. इसके विपरीत रोज़गार गारंटी से ग्रामीण युवक कृषि के कामों में लग जाते हैं. सच में सरकार ने खाद और डीज़ल आदि पर राहत बरकरार रखकर गांव को राहत पहुंचाने का प्रयास किया है.

इस बजट में उच्च शिक्षा के लिए क्या कुछ क़दम उठाए गए हैं? क्या-क्या घोषणाएं की गई हैं? विस्तार से बताएँ. गौतम कुमार, रूपाली समस्तीपुर

प्रत्येक राज्य में एक केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थापित करने की योजना है. नई आईआईटी और एनआईटी के लिए 450 करोड़ रुपये ख़र्च करने की योजना है. उच्च शिक्षा के लिए बजट में इतना मात्र कहा गया है.

भारत सरकार उद्योग धंधों को सब्सिडी क्यों दे रही है? किसानों को इतनी सब्सिडी क्यों नहीं मिलती? उद्योगों को मिली सब्सिडी का लगभग पूरालाभ उद्योगपतियों तक पहुँचाता है जबकि किसानों को मिली रियायत मेंहेराफ़ेरी से किसानों को बहुत कम मिलता है.अमितप्रभाकर, बंगलूरु

अमीरों के लगाए गए उद्योगों के बिना ग़रीबों को रोज़गार नहीं मिलेगा. इसलिए उद्योगों को सब्सीडी देने को ग़लत नहीं ठहराया जा सकता है. ज़रूरत यह थी कि उद्योगों को सब्सीडी रोज़गार पैदा करने के लिए देनी चाहिए. जैसे निर्यात के लिए सस्ते ऋण देने के स्थान पर हर उद्योग को प्रति श्रमिक एक हज़ार रुपए प्रति माह की सब्सीडी दी जा सकती है. ऐसी सब्सीडी से ग़रीब और अमीर दोनों का हित होता.

किसानों को तमाम सरकारी योजनाओं में उलझाने के स्थान पर कृषि उत्पादों के मूल्यों में वृद्धि करनी चाहिए. लेकिन इससे मध्य वर्ग आहत होता है. इसलिए सरकार जटिल योजनाएं बनाती है जिनमें मध्य वर्ग के सरकारी कर्मचारियों को पर्याप्त लाभ भी मिल जाए.

ये भारत और इंडिया में फ़र्क की बात से क्या मतलब है. क्या ये अंतर ख़त्म कर पाना संभव है. शब्बीर खन्ना, सऊदी अरब

भारत का अर्थ मेरी दृष्टि से कृषि यानी हमारी ऐतिहासिक स्थिति से बनता है. इंडिया का अर्थ सेवा क्षेत्र जैसे सॉफ़्टवेयर से बनता है. हम इस समय भारत से इंडिया जाने के कठिन सफ़र में लगे हुए हैं. इस फेरबदल में भारत का दबना और इंडिया का उठना स्वाभाविक है. इससे विचलित नहीं होना चाहिए. याद रखें कि स्वतंत्रता के समय हमारी आय में कृषि का हिस्सा 56 प्रतिशत था जो आज 18 प्रतिशत रह गया है. इस स्वाभाविक गति से आत्मसात करना चाहिए.

बजट में औद्योगिक विकास दर, रियल एस्टेट, उड्डयन और विनिवेश के बारे में कुछ नहीं है. अभिलाष थाठानी, अहमदाबाद

वित्तीय घाटे में वृद्धि के माध्यम से औद्योगिक विकास दर को उंचा बनाए रखने का प्रयास वित्त मंत्री ने किया है. सरकार जब हाईवे बनाती है तो स्टील, सीमेंट और श्रम की मांग बढ़ती है. उड्डयन एवं प्रापर्टी मौलिक अर्थव्यवस्था नहीं बनाते हैं. इसलिए इनके लिए विशेष पैकेज नहीं देना ठीक ही है. वित्त मंत्री की कमी प्रशासनिक सुधारों जैसे लाइसेंसिंग आदि में छूट न देने की है. वित्त मंत्री ने विनिवेश को बढ़ाया है जबकि ज़रूरत निजीकरण को बढ़ाने की थी. इस मद पर बजट ने एक सुनहरे अवसर को गंवा दिया है जैसाकि आप कह रहे हैं.

बुलेट ट्रेनों का क्या हुआ, नेशनल वॉटर ग्रिड का क्या बना, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को प्रोत्साहन देने, मूलभूत ढ़ांचे और ई-गवर्नेंस का होगा.? मत्यराज सिंह.

बुलेट ट्रेन आम बजट का हिस्सा नहीं है. मेरी जानकारी में सरकार सोलर पावर के प्रति गंभीर है. हालाँकि इसके लिए विशेष प्रावधान न करने में चूक हो गई है.नेशनल वाटर ग्रिड का मुद्दा राज्यों के बीच उलझा हुआ है. ऐसा लगता है कि सरकार राज्यों को छेड़ना नहीं चाहती है.बुनियादी संरचना में सरकारी निवेश बढ़ाया गया है जो आपके द्वारा बताई दिशा के अनुरूप है.इ-गवर्नेन्स के प्रति भी सरकार गंभीर है, लेकिन बाबुओं के विरोध से बचने के लिए शायद इसे चुपचाप करने की योजना है.