'थोड़ी खुशी, थोड़ा गम'

Image caption अख़बारों ने ग्रामीण निवेश बढ़ने को प्रमुखता दी है.

भारत से प्रकाशित होने वाले लगभग सभी हिंदी-अंग्रेज़ी अख़बारों ने आम बजट को गाँवों की दशा सुधारने की कोशिश बताया है. ग्रामीण इलाक़ों में विकास की बयार तेज़ करने के लिए भारी निवेश सुर्ख़ियों में है.

हालाँकि नौकरीपेशा वर्ग को उम्मीद से कम राहत और कंपनियों को कोई ख़ास कर छूट नहीं देने का ज़िक्र भी किया गया है. साथ ही बजट से भारी उम्मीद लिए शेयर बाज़ार में आई भारी गिरावट को जगह मिली है लेकिन प्रमुखता नहीं.

दैनिक जागरण ने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के माथे पर सेहरा लगा कर उन्हें बजट के पिटारे के साथ चित्रित किया है. उनके आस-पास एलसीडी टेलीविज़न, जीवन रक्षक दवाइयों की शीशी और मोबाइल फ़ोन को दिखाया है जिनके दाम घटने वाले हैं.

अख़बार ने बजट को 'सौ खरब का तिलिस्म' बताया है और बजट को 'मंदी भगाने का मंतर'. इसके संपादकीय ने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की कोशिश को संतुलन की कसरत करार दिया है. अख़बार लिखता है कि ऐसा आम बजट बनाना संभव नहीं जो समाज के सभी वर्गों को समान भाव से संतुष्ट कर सके.

अंग्रेज़ी दैनिक टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने एक रोती हुई ग़रीब लड़की की तस्वीर छापी है और एक गुमनाम हाथ उसके आँसुओं को पोछने की कोशिश कर रहा है. अख़बार लिखता है कि बजट के ज़रिए इंडिया भारत को खोजने की कोशिश कर रहा है.

लेकिन संपादकीय में कहा गया है कि बजट में दूरदृष्टि का अभाव है और निजी निवेश बढ़ाने की कोशिश नहीं की गई है. इसके मुताबिक सिर्फ़ 'आम आदमी' पर ज़ोर देकर मंदी से निपटना संभव नहीं है.

द इकोनॉमिक टाइम्स सेंसेक्स में 850 अंकों से ज़्यादा की गिरावट की ख़बर को प्रमुखता देते हुए लिखता है कि चुनावों ने यूपीए को आम आदमी को खुश करने का जनादेश दिया लेकिन आम निवेशक की लुटिया डूब गई.

अख़बार ने अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सरकारी निवेश में 13 फ़ीसदी की वृद्धि का ज़िक्र किया है, साथ ही राजकोषीय घाटा जीडीपी का लगभग सात फ़ीसदी हो जाने पर चिंता जताई है. फ़्रिंज बेनिफिट टैक्स हटाने, आईटी कंपनियों के लिए कर छूट में विस्तार और आयकर छूट की सीमा बढ़ाने को विशेष चार्ट के ज़रिए दिखाया गया है.

'बाबू मोशाय का इंद्रजाल'

नव भारत टाइम्स ने सुर्ख़ी लगाई है - थोड़ी खुशी थोड़ा गम. अख़बार के पहले पन्ने का ऊपरी सिरे में प्रणब, सोनिया, मनमोहन और राहुल गांधी को एक खुली जीप में सवार होकर जाते दिखाया है. आगे सड़क पर लगे साइनबोर्ड पर लिखा है, वेलकम टु वोटरपुर.

Image caption उद्योग जगत की बजट पर मिश्रित प्रतिक्रिया रही

दैनिक हिंदुस्तान की हेडलाइन है - बाबू मोशाय का इंद्रजाल. इसकी मुख्य रिपोर्ट के मुताबिक चुनावी वादों और सरकार के सौ दिन के एजेंडे को ध्यान में रखते हुए प्रणब मुखर्जी ने वोटर को हंसाया ज़रूर, लेकिन थमाया कुछ ख़ास नहीं. गुड़ कम दिया, गुड़ सी मीठी बातें ज़्यादा की.

हिंदुस्तान टाइम्स और द एशियन एज ने बजट को विकास की गति तेज़ करने वाला बताया है. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक वित्त मंत्री आम आदमी को केंद्र में रखा है लेकिन आर्थिक सुधारों का वादा भी किया है.

एशियन एज ने बजट का आंकड़ा दस लाख करोड़ के पार जाने को प्रमुखता दी है और राष्ट्रीय रोज़गार गारंटी योजना के मद में 144 फ़ीसदी की भारी बढ़ोत्तरी को भी दर्शाया है. अख़बार ने बजट को विकास की भूख बढ़ाने वाला बताया है.

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