‘विनिवेश सही समय पर’

प्रणब मुखर्जी
Image caption प्रणब मुखर्जी का कहना है कि इस वक्त विनिवेश का सही वक्त नहीं है

भारत के वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि विनिवेश के लिए बजट को ही माध्यम बनाना ठीक नहीं है. विनिवेश के लिए एक बड़ी तस्वीर सरकार के पास है पर इसके लिए बजट ही एकमात्र ज़रिया नहीं है. विनिवेश होगा पर सही समय आने पर.

हालांकि विनिवेश कितना होगा, किन क्षेत्रों में होगा और किस समयावधि में कर लिया जाएगा, इसके बारे में बताने से वित्तमंत्री साथ मुकर गए. उन्होंने कहा कि सही समय आने पर पारदर्शी तरीके से विनिवेश का काम किया जा सकता है.

बीबीसी से एक विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि बैंकिंग और बीमा क्षेत्र पर सरकार के नियंत्रण बने रहने के कारण ही आज भारत में आर्थिक मंदी की मार इन क्षेत्रों पर इतनी बुरी नहीं पड़ी है जितनी कि दुनिया के बाकी हिस्सों में. ऐसे में जो ग़लती दूसरे लोगों ने की है उसे अपने यहाँ दोहराने से बचना चाहिए.

पर ऐसा नहीं है कि मौजूदा सरकार विनिवेश के मुद्दे पर पूरी तरह से पिछली यूपीए सरकार के ढर्रे पर है. विनिवेश के संकेत तभी दे दिए गए थे जब राष्ट्रपति ने नई संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया था.

वित्तमंत्री ने कहा, "विनिवेश आर्थिक सुधार और अर्थव्यवस्था को मज़बूती देने का एक माध्यम तो हो सकता है पर इसी के आधार पर आर्थिक विकास को बनाए रखने की बात नहीं की जा सकती है. विनिवेश को दरअसल एक फायदेमंद निवेश की तरह देखने की ज़रूरत है."

वहीं वित्तमंत्री विकसित देशों के संरक्षणवादी रवैये की निंदा करने से भी नहीं चूके. उन्होंने कहा कि विकसित देशों को यह बात समय रहते समझ लेनी चाहिए कि संरक्षणवाद से वे दूसरी अर्थव्यवस्था को तो नुकसान पहुँचा ही रहे हैं साथ ही अपनी अर्थव्यवस्थाओं के सुधार के रास्ते को भी बंद कर रहे हैं.

गिरते निर्यात पर चिंता

दरअसल वित्तमंत्री की ओर से यह बयान ऐसे वक़्त में आ रहा है जब भारत से निर्यात के गिरने को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है और प्रधानमंत्री इटली की यात्रा पर हैं जहाँ वो भी जी-8 देशों के सम्मेलन के दौरान इस मुद्दे को उठा सकते हैं.

वित्तमंत्री ने ऐसे तर्कों को भी खारिज किया कि शेयर बाज़ार और उद्योगजगत ने उनके बजट के प्रति उत्साह कम, निराशा ज़्यादा दिखाई है.

उन्होंने कहा, "बाज़ार के निराश होने का स्तर इसलिए भी ज़्यादा है क्योंकि उन्होंने वित्तमंत्री से तब बहुत सारी उम्मीदें पाल रखी थीं जब कि भारत की अर्थव्यवस्था भी एक कठिन चुनौती के दौर से गुज़र रही है. हालांकि उद्योग जगत की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही है और मेरी एसोचैम, फ़िक्की, सीआईआई के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा सकारात्मक प्रतिक्रिया वाली रही है."

यह पूछे जाने पर कि आगे की राह वो किस तरह से देख रहे हैं, उन्होंने कहा कि बजट ही आर्थिक विकास को तय करने का एकमात्र ज़रिया नहीं है. सरकार ने लोगों से बहुत से वादे किए हैं और पांच बरसों में सरकार का लक्ष्य उन्हें हासिल करने का है. ताज़ा वक़्त में ज़रूरत आर्थिक विकास के क्रम को बनाए रखने की है.

उन्होंने कहा कि दोबारा पाँच साल के सफ़र की अभी शुरुआत भर हुई है और सरकार का लक्ष्य है कि पाँच साल बाद वो एक सफल सरकार के तौर पर लोगों के सामने खड़ी हो सके.

संबंधित समाचार