मौद्रिक नीति की घोषणा की तैयारी

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) मंगलवार को मौद्रिक नीति की घोषणा करेगा. उम्मीद जताई जा रही है कि इसमें मोटे तौर पर किसी भी तरह की दरों में बदलाव नहीं किया जाएगा.

इस बीच आरबीआई ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए विकास दर के अनुमान में संशोधन किया है. नए अनुमान के मुताबिक भारत की विकास दर 6.5 फ़ीसदी रहने की उम्मीद है.

अप्रैल में 5.7 फ़ीसदी दर का अनुमान लगाया गया था. लेकिन आरबीआई का कहना है कि स्थिति पहले से बेहतर है हालांकि हालात ऐसे नहीं है कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक स्थिति में सुधार हो पाए.

रिज़र्ब बैंक ने कहा है कि मौद्रिक नीति तैयार करने में की़मतों के लेकर बना दबाव एक बड़ी चुनौती है, ख़ासकर तब जब घरेलू बाज़ार में माँग में गिरावट देखी जा रही है.

आर्थिक मामलों के जानकार आलोक पौराणिक का कहना है, " ज़्यादा हताश होने की ज़रूरत नहीं है. जैसी आर्थिक स्थिति पहले नज़र आ रही थी और जो हालात अब हैं उसे देखकर लगता है कि स्थिति उतनी बुरी नहीं है."

विकास दर

11 जुलाई के आँकड़ों के मुताबिक मुद्रस्फ़िति की दर (-) 1.2 फ़ीसदी चल रही है. हालांकि ज़्यादातर खाने पीने की चीज़ों के दामों में वृद्धि हुई है.

अर्थव्यवस्था की समीक्षा की अपनी रिपोर्ट में आरबीआई ने कहा है कि खाद्य सामग्री की कीमतें बहुत ज़्यादा है और कम बारिश से स्थिति और बिगड़ सकती है.

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि आर्थिक हालात मुश्किल बने हुए हैं और नौ फ़ीसदी विकास दर के लिए कृषि क्षेत्र में चार फ़ीसदी का विकास होना ज़रूरी है.

आरबीआई इस साल कई बार ब्याज दर घटा चुका है. रिज़र्व बैंक ने जून में रेपो रेट को 25 अंक घटा कर 4.75 प्रतिशत कर दिया था.

रेपो दर उस दर को कहते हैं जिस पर रिज़र्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को छोटी अवधि के लिए कर्ज देता है, जबकि रिवर्स रेपो रेट ठीक इसके विपरीत है.

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