किसे मिलेगा लड़ाकू विमानों का ऑर्डर?

विमान
Image caption विमानों के परीक्षण के बाद किसी एक कंपनी का चयन होगा.

भारत सरकार 126 लड़ाकू विमान खरीदना चाहती है और इसका ठेका पाने के लिए विश्व की छह बड़ी और दिग्गज विमान कंपनियाँ जद्दोजहद कर रही हैं.

ये पूरा सौदा दस अरब डॉलर यानी लगभग 50 हज़ार करोड़ रुपए का है. पहली बार इस दौड़ में अमरीकी कंपनिया भी शामिल हैं.

इन छह कंपनियों के विमानों के परीक्षण शुरू हो गए हैं. आजकल भारतीय वायु सेना के पायलट अमरीकी एफ़-18 सुपर हॉर्नेट्स का बंगलौर में परीक्षण कर रहे हैं. इसकी गिनती आधुनिकतम लड़ाकू विमानों में होती है.

बंगलौर के बाद इस विमान का परीक्षण राजस्थान के रेगिस्तानों में होगा जहाँ देखा जाएगा की गर्मी में ये विमान किस तरह काम करता है. फिर इसे ऊँचाइयों में परखने के लिए लद्दाख में उड़ाया जाएगा.

बढ़ता बाज़ार

एफ़-18 के निर्माता बोइंग इसको लेकर काफी आशावादी हैं. बोइंग के भारत अध्यक्ष विवेक लाल का कहना है, "जैसे जैसे भारत अपनी सेना का आधुनिकीकरण करता है हमें यहाँ पर एक अवसर दिख रहा है क्योंकि हमारा अनुमान है की आने वाले 10 सालों में यहाँ पर 31 अरब डॉलर का कारोबार हो सकता है और सच यही है की बाज़ार बढ़ रहा है और प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी. ये हमारे लिए बहुत ही अच्छी बात है कि हम अपने विमान यहाँ दिखा पा रहे हैं."

बोइंग के साथ-साथ इस सौदे को पाने के लिए अमरीका की ही कंपनी लॉकहीड मार्टिन अपने एफ़-16 के साथ दौड़ में है. साथ ही है फ्रांस का रेफाल, स्वीडन मे बना ग्रिपन विमान, रूसी मिग-35 और यूरोपीय टाइफून.

विमानों के परीक्षण अगले 18 महीने चलेंगे जिसके बाद 126 विमानों के लिए ऑर्डर दिया जाएगा.

भारत पहले अपनी सुरक्षा ज़रूरतों के लिए अधिकतर रूस पर निर्भर रहा है लेकिन कुछ सालों से भारत पश्चिमी देशों की और भी देखने लगा है.

अमरीकी कंपनियाँ ये आशा कर रही हैं की भारत और अमरीका के बीच रिश्ते सुधरने की वजह से सौदा उनके पक्ष में जा सकता है लेकिन उन्हें यूरोपीय देशों से कड़ी टक्कर का सामना करना पड़ सकता है.

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