'मंदी से बाहर आने की प्रक्रिया शुरु'

आईएमएफ़
Image caption आईएमएफ़ का कहना है कि वैश्विक मंदी से बाहर आने की प्रक्रिया आसान नहीं होगी

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का कहना है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था आर्थिक मंदी के असर से बाहर आनी शुरु हो गई हैं लेकिन ये प्रक्रिया आसान नहीं होगी.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ़) के प्रमुख अर्थशास्त्री ओलिवर ब्लैंचार्ड का कहना है कि मंदी ने गहरे घाव छोड़े हैं जिसकी वजह से मांग और आपूर्ति, दोनों ही कई वर्षों तक प्रभावित रहेंगे.

ओलिवर ब्लैंचार्ड की ये टिप्पणी इन ख़बरों के बात आई है फ्रांस और जर्मनी के बाद जापान में अर्थव्यवस्था में वृद्धि दर्ज की गई है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने जुलाई में कहा था कि अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से बाहर आनी शुरू हो गई थी.

ओलिवर ब्लैंचार्ड ने अपनी ताज़ी रिपोर्ट में भविष्यवाणी की है कि मंदी से पूर्व जो वैश्विक उत्पाद था वो भी कम रहेगा.

संतुलन

ब्लैंचार्ड के मुताबिक देशों को अपनी अर्थव्यवस्थाओं में संतुलन लाना होगा.

उनका कहना था कि अमरीका जैसे देश जहाँ की अर्थव्यवस्था खपत पर आधारित है, उन्हें अपना निर्यात बढ़ाने पर ध्यान देना होगा और वो भी ऐसे वक्त में जब एशियाई देशों से आयात बढ़ रहा है.

ब्लैंचार्ड का कहना था कि कई विकसित देशों को अपनी ख़राब आर्थिक व्यवस्था में सुधार लाने के लिए लंबा समय चाहिए.

उधर मंदी के दौर से पहले जिस रफ़्तार से उभरते विकासशील देशों में पूंजी आ रही थी, उस रफ़्तार में कमी आई है और उसे वापस पुराने स्तर पर आने में समय लगेगा.

ब्लैंचार्ड ने आगाह किया कि अगले वर्ष तक बेरोज़गारी अपनी चरम सीमा तक नहीं पहुंचेगी. उनका कहना था कि मंदी से निपटने में जितना खर्चा हुआ है उस वजह से करों में बढोत्तरी निश्चित है.

बीबीसी के प्रमुख अर्थशास्त्री ह्यू पेम का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष हमेंशा सतर्क रहता है.

बैंक ऑफ़ इंग्लैंड के मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी के एक पूर्व सदस्य प्रोफ़ेसर डेविड ब्लैंचफ़्लावर का कहना है कि कुछ देशों से ऐसे संकेत आ रहे हैं कि वहाँ उनके सबसे बुरे दिन खत्म हो गए हैं.

लेकिन उनका ये भी कहना था कि ये बात नहीं भूलनी चाहिए कि यूरोपियन संघ में अब भी 20 देश मंदी से जूझ रहे हैं.

प्रोफ़ेसर ब्लैंचफ़्लावर ने कहा कि जिस संतुलन की बात ओलिर ब्लैंचार्ड कह रहे हैं वो अपने आप से होने वाला नहीं है.

उनका कहना है कि कुछ देशों में हालत में जिस तरह का सुधार दिख रहा है वो वहाँ की सरकारों के सहायता पैकेज का नतीजा है और ये ख़तरा ज़रूर है कि पैकेज के असर के खत्म होने के बाद वहाँ मंदी का दौर फिर से शुरू हो जाएगा.

मंदी वापसी का डर

जापान में विकास दर में वृद्धि से पहले करीब साल भर अर्थव्यवस्था में संकुचन देखा गया था.

पत्रकारों का कहना है विकास दर में वृद्धि का कारण सरकार का भारी सहायता पैकेज था.

हाल ही के आंकड़ों से पता चला था कि जर्मनी, फ्रांस और हांगकांग की अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक मंदी से बाहर निकल रही हैं.

फ्रांस औऱ जर्मनी की अर्थव्यवस्थाएं अप्रैल और जून के बीच में 0.3 प्रतिशत की रफ़्तार से बढ़ी थीं, जिससे ऐसे संकेत मिले थे कि ये अर्थव्यवस्थाएं वैश्विक मंदी से बाहर निकल रही हैं.

हालांकि ये आंकड़े प्रेक्षकों की उम्मीदों के विपरीत थे.

अप्रैल औऱ जून के बीच हांगकांग की अर्थव्यवस्था में 3.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई थी.

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