तेल की क़ीमत में उछाल

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमत पिछले 10 महीने के सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँची है. ऐसा वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के वापस पटरी पर आने के संकेत मिलने के बाद हुआ है.

Image caption अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेतों के बीच तेल की क़ीमतें बढ़ी हैं

न्यूयॉर्क में अमरीकी हल्के कच्चे तेल की क़ीमत 39 सेंट बढ़कर दोपहर तक 74.28 डॉलर तक पहुँच गई थी. पिछले साल अक्तूबर के बाद ये अब तक की सबसे ऊँची क़ीमत रही.

तेल की क़ीमतों में ये इज़ाफा उन आधिकारिक आँकडों के बाद आया, जिसमें ये बताया गया है कि जून में यूरा मुद्रा के प्रचलन वाले 16 देशों की नई औद्योगिक व्यवस्था में सामान्य से ज़्यादा बढ़ोत्तरी हुई है.

लंदन का ब्रेंट कच्चा तेल भी छह सेंट बढ़कर 74.25 डॉलर तक पहुँच गया.

सकारात्मक संकेत

चीन से ख़बर है कि पिछले साल जुलाई की तुलना में इस बार तेल की मांग 3.5 प्रतिशत बढ़ी, जिसे देखते हुए वहाँ भी तेल की क़ीमत बढा दी गई है.

शिकागो के फ़ेडेरल रिज़र्व की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले महीने जुलाई में अमरीका की आर्थिक गतिविधियों में सुधार आया है.

विश्व भर में कच्चे तेल की क़ीमतें इस साल अब तक 65 प्रतिशत तक बढ़ी हैं.

अमरीका में कच्चे तेल की क़ीमत पिछले साल जुलाई में रिकॉर्ड ऊँचाई तक पहुँची थी. उस समय प्रति बैरल कच्चे तेल की कीमत 147 डॉलर थी.

लेकिन विश्व में आर्थिक मंदी बढ़ने के साथ इस पर असर पड़ा. इस साल की शुरुआत में प्रति बैरल तेल की क़ीमत 30 डॉलर तक पहुँच गई.

एमएफ़ ग्लोबल के विशेषज्ञ एडवर्ड मरे का कहना है कि अगर आर्थिक प्रगति की दशा यूँ ही बरक़रार रही तो तेल की क़ीमत 80 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती है.