अमरीकी बजट घाटा और बढ़ेगा

डॉलर
Image caption अमरीका में मंदी गहरा रही है

अमरीका में व्हाइट हाउस और कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि देश का बजट घाटा बढ़कर 1.6 लाख करोड़ डॉलर हो जाएगा जो कि अबतक का रिकॉर्ड है.

ये घाटा राष्ट्रपति ओबामा के 787 अरब डॉलर के राहत पैकेज और मंदी के कारण करों की उगाही में आई कमी के कारण हुआ है. वर्ष 2008 में ये घाटा 455 अरब डॉलर था.

अगर व्हाइट हाउस की मानें तो ये घाटा और बढ़ेगा और 2010-2019 के दौर में कुल नौ लाख करोड़ का हो जाएगा.

लेकिन ये आशा भी की जा रही है कि अमरीकी अर्थव्यवस्था इस साल सुधार की राह पकड़ लेगी.

व्हाइट हाउस के हिसाब से बेरोज़गारी की दर 10 प्रतिशत को इस साल पार करेगी और फिर 2010 में इसमे गिरावट देखने को मिलेगी. हाल मे जारी आंकड़ों में, जुलाई में इसे 9.4 प्रतिशत आँका गया है.

गंभीर स्थिती

ये नवीनतम आंकड़े व्हाइट हाउस और कांग्रेशनल बजट ऑफिस ने, जो कि एक निष्पक्ष संगठन है, जारी किए है.

व्हाइट हाउस के मैनेजमेंट और बजट विभाग के निदेशक पीटर ओरज़ाग का कहना है कि ये दिखाता है कि “हमें विरासत में कितनी खस्ता हाल वित्तीय स्थिति मिली थी और देश को टिकाऊ वित्त व्यवस्था तक पहुंचाने के लिए कितने गंभीर कदमों की ज़रुरत होगी.”

राष्ट्रपति की एक आर्थिक सलाहकार क्रिसटिना रोमर का कहना है कि मंदी पहले के आंकलन से ‘ज़्यादा गंभीर’ है.

उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस का अब अनुमान है कि 2009 में अर्थव्यवस्था 2.8 फीसदी सिकुड़ेगी, जो कि साल के शुरु में बताए गए आंकड़ो से दोगुनी दर है.

अब अनुमान है कि आर्थिक विकास दर 2010 में दो प्रतिशत रहेगी, जबकि पहले अनुमान था कि ये 3.2 प्रतिशत रहेगी. पर 2011 तक आशा की जा रही है कि अर्थव्यवस्था में सुधार होगा और विकास दर 3.6 प्रतिशत रहेगा.

नियंत्रण से बाहर

विपक्षी रिपब्लिकन पार्टी का कहना है कि घाटे के नवीनतम आंकड़े गहरी चिंता का विषय है.

सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के नेता मिच मैकानल का कहना है, “हमारी अर्थव्यवस्था पर जो अलार्म की घंटी थी वो अब सायरन में तब्दील हो गई है.”

विश्लेषकों का कहना है कि घाटे के ये आंकड़े बताते है कि जब ये बात तय हो जाएगी कि मंदी का दौर समाप्त हो गया है तो अमरीका में कर बढ़ेंगे.

कांग्रेशनल बजट ऑफिस का कहना है कि ऐसा करना ज़रुरी होगा.

उसका कहना है कि “देश को टिकाऊ वित्त स्थिति पर लौटाने के लिए कम खर्च करने और ज़्यादा राजस्व कमाने का तरीका ढ़ूढँना होगा.’’

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