राजमार्गों का फिर से नामकरण होगा

कमल नाथ
Image caption कमल नाथ ने लंदन में निवेशकों की शंकाएँ दूर करने की कोशिशें कीं

भारत के सड़क परिवहन और राजमार्ग मामलों के मंत्री कमल नाथ ने भारत में राजमार्गों के नामों को अवैज्ञानिक बताते हुए कहा है कि उनका फिर से नामकरण किया जाएगा.

साथ ही कमल नाथ ने कहा कि सरकार हर साल सात हज़ार किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य पाने के लिए निवेशकों को आकर्षित कर रही है और इसके लिए जिन नियम-क़ानूनों में बदलाव की ज़रूरत है वो सितंबर के अंत तक कर लिया जाएगा.

निवेशकों को सड़कों के क्षेत्र में निवेश के लिए जागरूक बनाने और उनकी शंकाएँ दूर करने के लिए कमल नाथ इन दिनों लंदन में हैं. इन बैठकों के ज़रिए वह दो साल में 10 अरब डॉलर का निवेश पाना चाह रहे हैं.

उन्होंने कहा कि उन्हें निवेशकों में उत्साह दिख रहा है और इस तरह की बैठकों का नतीजा अच्छा निकलेगा.

कमल नाथ ने बताया, "ये सात हज़ार किलोमीटर प्रति साल यानी लगभग 20 किलोमीटर प्रति दिन सड़क बनाने का हमारा लक्ष्य है और मुझे पूरा विश्वास है कि हम इसे पूरा करेंगे. हम इसकी पूरी तैयारी में हैं कि पूरा निवेश आए. इस बारे में हमें विदेश से जिस निवेश की ज़रूरत है मुझे पूरा विश्वास है कि वो निवेश आएगा."

सड़क परिवहन मंत्री ने भारत में इसे बुनियादी ढाँचे के विकास का दशक बताते हुए कहा कि हर साल 7,000 किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य पाने के लिए ज़रूरी है कि कम से कम 20 हज़ार किलोमीटर सड़क निर्माण का काम हो रहा हो.

राजमार्गों का नाम

राजमार्गों का नाम बदलने के बारे में उन्होंने कहा, "सरकार के 100 दिन पूरा होने के मौक़े पर मैं बता सकता हूँ कि हम राजमार्ग का फिर से नामकरण करेंगे और ये तरीक़ा ज़्यादा वैज्ञानिक होगा."

कमल नाथ ने बताया कि आने वाले समय में जो राजमार्ग बनेंगे उनमें से 60 से 65 प्रतिशत तक टोल मॉडल पर बनेंगे यानी लोगों को उन पर टोल टैक्स देना होगा. उनका कहना था कि उस धन के ज़रिए सड़कों की मरम्मत पर भी ध्यान दिया जाएगा.

कमल नाथ के अनुसार, "राजमार्गों के निर्माण की दिशा में ज़मीन का अधिग्रहण कोई बड़ी परेशानी नहीं होगी. ये संघर्ष का मुद्दा नहीं है क्योंकि इसके लिए न तो बड़े ज़मीन के अधिग्रहण की ज़रूरत होती है और राजमार्ग बनने के बाद बची हुई ज़मीन का मूल्य भी बढ़ जाता है."

उनका कहना था कि भारत में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ेगी ही और ऐसे में अभी लगभग 20 हज़ार किलोमीटर राजमार्ग सिर्फ़ एक लेन का है जिसे बदलने की ज़रूरत होगी.

कमल नाथ का कहना था कि भारत में सड़क निर्माण सिर्फ़ संपर्क का ही मसला नहीं है बल्कि ये भारत में समग्र विकास का एक हिस्सा है.

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