लौट रहे हैं मायूस होकर

कार सेल
Image caption सबसे ज़्यादा नौकरियां कार उद्दोग में थीं. अब वहां भी सूखा है. जब अमरीकियों को नौकरियां नहीं मिल रही हों तो भारतीयों को कौन पूछेगा.

भारत से अमरीका आकर सैंतीस वर्षीय आई टी पेशेवर मजेंदर राजसेखरन कोई ढाई साल से अमरीका में माईंड ट्री नाम की आई टी कंपनी में काम कर रहे थे. न्यू जर्सी में पूरे परिवार के साथ उनका जीवन काफ़ी खुशहाल था.

अब उन्हें कंपनी की तरफ़ से कहा गया है कि आप या तो नौकरी छोड़ दें या फिर भारत वापस जाकर इसी कंपनी में काम करें.

इस हफ़्ते राजसेखरन अपने पूरे परिवार के साथ बंगलौर लौट रहे हैं.

अब वहां उन्हे इसी कंपनी में काम करना है लेकिन वह इस बात से परेशान हैं कि अमरीका में उनके काम का तजुर्बा भारत में काम नहीं आएगा.

और यह सिर्फ़ मगेंदर राजसेखरन की ही कहानी नहीं है.

हज़ारों पेशेवर अब अमरीका में नौकरियां छूटने के बाद भारत वापस जाने पर मजबूर हो रहे हैं.

ख़ासतौर पर वो जिनकी कंपनियों में कर्मचारियों की छटनी की गई है और जिन्हें किसी दूसरी कंपनी में काम नहीं मिल रहा है.

कई महीनों की आर्थिक मंदी के बाद अब कुछ हफ़्तों से विश्व भर की अर्थव्यवस्था में अब थोड़ी गर्मी आने की बात की जाने लगी है. लेकिन कई देशों की तरह अमरीका में बेरोज़गारी का प्रकोप अब भी जारी है.

और इसका सीधा असर अमरीका में भारतीय मूल के पेशेवर लोगों पर भी पड़ रहा है.

Image caption सुकुमार का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से लौटने वालों की तादाद और बढ़ी है.

मजेंदर राजसेखरन कहते हैं, मंदी का असर ऐसा पड़ा है कि हमारी कंपनी की बिक्री में 15 प्रतिशत की कमी आई है और इसकी भरपाई करने के लिए कंपनी ने बहुत से लोगों को नौकरी से निकाल दिया है.’’

उनका कहना है कुछ को भारत जाकर काम करने की पेशकश की जाती है लेकिन बहुत से ऐसे भी हैं जो बिना नौकरी के ही भारत जा रहे हैं.

राजसेखरन कहते हैं कि वह एल 1 वीज़ा पर अमरीका आए हैं और इसलिए किसी दूसरी कंपनी में नौकरी कर भी नहीं सकते, वैसे अन्य कंपनियां भी आजकल नौकरी नहीं दे रही हैं.

उन्होंने बताया कि उनके भारत वापस जाने के फैसले से उनका परिवार दुखी भी हुआ लेकिन और कोई चारा भी तो नहीं है.

भारत के बंगलौर शहर से आने वाले एक औऱ आई टी पेशेवर हैं नूरउद्दीन ग़ौस जो पिछले साल अप्रैल महीने से भारत की मशहूर टाटा कंपनी के अमरीका स्थित दफ़्तर में आकर काम कर रहे थे.

लेकिन उनकी कंपनी में भी पेशेवर कर्मचारियों को अमरीका से वापस भारत भेजा जा रहा है.

ग़ौस कहते हैं, जो नौकरियां अमरीका में मिल रही हैं उनमें जॉब सैटिस्फ़ैक्शन नहीं है. छोटी मोटी मेंटेनेंस की नैकरियां ही मिल रही हैं क्योंकि विकास यहां ठप्प हो चुका है.’’

उनका कहना है बहुत से लोगों को नौकरी से निकाल दिया गया है और इस वजह से काम बहुत ज़्यादा बढ़ गया है औऱ जो लोग काम कर रहे हैं उनमें से एक आदमी को कई लोगों का काम करना पड़ रहा है. कहते हैं अबतो छुट्टियां भी नहीं दी जा रही हैं.

इसलिए अब ग़ौस साहब भी अपना सामान इकठ्ठा करके भारत वापस जाने की तैयारी कर रहे हैं.

सिर्फ़ अमरीकियों को नौकरी

बहुत सी बड़ी-बड़ी अमरीकी कंपनियों को अमरीकी सरकार की तरफ़ से इस मंदी के दौर से उबरने के लिए मदद के तौर पर धन दिया गया है लेकिन साथ में यह भी कहा गया है कि ये कंपनियां सिर्फ़ अमरीकी लोगों को ही नौकरी दे सकती हैं.

इससे हज़ारों भारतीय पेशेवरों पर सीधा असर पड़ा है औऱ उन्हें इन कंपनियों में काम न मिलने के कारण अब वापस भारत लौटना पड़ रहा है.

Image caption प्रशांति रेड्डी कहती हैं कि कंपनियां एच1बी वीज़ा के लिए आवेदन भी नहीं कर रहीं.

विदेशियों को अमरीकी कंपनियों में काम देने के लिए सरकार हर साल 65 हज़ार एच1बी वीज़ा जारी करती है. इसके तहत कंपनियों को पेशेवर लोगों के लिए आवेदन भरना होता है. लेकिन इस साल मंदी के कारण बहुत सी कंपनियां एच1बी के लिए आवेदन ही नहीं भर रही हैं.

इस वजह से अप्रैल महीने में शुरू होने वाली आवेदन पत्र भरने की प्रक्रिया के पांच महीने गुज़र जाने के बाद भी 20 हज़ार वीज़ा खाली पड़े हैं और कोई लेने वाला नहीं है. इससे पहले यह वीज़ा कोटा एक हफ़्ते में ही समाप्त हो जाते थे.

भारतीय मूल की एक आप्रवासन मामलों की वकील प्रशांति रेडडी अमरीका में रहने वाले भारतीय पेशेवरों और कंपनियों को एच 1 बी वीज़ा और अन्य संबंधित मामलों में मदद करती हैं. इनके दो दफ़्तर हैं, एक मैनहैटन में और एक भारत के हैदराबाद में.

रेडडी कहती हैं, मेरे बहुत से क्लाईंट्स कंपनियों के मालिक, पेशेवरों को नौकरी देने के लिए एच 1 बी वीज़ा नहीं ले पा रहे हैं औऱ अपनी कंपनियां बंद कर रहे हैं. और पेशेवरों को सबसे बड़ी मुश्किल इसी बात की है कि उनकी नौकरी छूट गई है और दूसरी कोई कंपनी उनके लिए एच 1 बी वीज़ा स्पॉंसर करने को तैयार नहीं है.

ऐसे में पेशेवर कर्मचारी भारत वापसी का ही रूख़ करते हैं.

कुछ आर्थिक पेशेवर यह मानते हैं कि यह उनके लिए अच्छा भी साबित हो सकता है.

भारतीय मूल के अनु शर्मा न्यूयॉर्क स्थित मशहूर शेयर बाज़ार नैस्डैक के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं.

अनु शर्मा का कहना है, यहां नौकरियां नहीं मिल रही हैं इसके अलावा तन्ख्वाहों में भी कटौती की जा रही है. वहीं भारत में मंदी के खत्म होते ही पेशेवर कर्मचारियों की बहुत ज़्यादा मांग बढ़ने की उम्मीद है और बहुत से लोग वापस भारत जा रहे हैं.

उनका मानना है कि अमरीकी अर्थव्यवस्था चूंकि परिपक्व है इसलिए मंदी के खत्म होने के बाद भी इसका विकास धीरे होगा जबकि भारत की अर्थव्यवस्था अभी परिपक्व नहीं है इसलिए उसमें बहुत तेज़ी से विकास होने की संभावना है जिसके साथ ही पेशेवर लोगों की मांग भी बहुत बढ़ सकती है.

केलेमन सुकुमार न्यू जर्सी में ईस्ट ऐंड वेस्ट लॉजिस्ट्क्स नामक एक कंपनी चलाते हैं जो हमेशा के लिए अमीरका से भारत जाने वाले लोगों के सामान को सुरक्षित भारत पहुंचाने का काम करती है.

सुकुमार का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से उनके पास हर हफ़्ते 10 से ज़्यादा ऐसे परिवार आ रहे हैं जिन्हें नौकरी छूटने की वजह से भारत वापस जाना पड़ रहा है.

सुकुमार कहते हैं, इनमें से लगभग सभी ऐसे लोग हैं जिनका या तो कंपनी अनुबंध ख़त्म हो गया है या वीज़ा खत्म हो गया है. औऱ पिछले कुछ महीनों में ऐसे परिवारों की संख्या बहुत ज़्यादा बढ़ गई है.

हज़ारों का नुकसान

इनमें से ज़्यादातर आई टी क्षेत्र में काम करने वाले पेशेवर लोग हैं जिनकी कंपनियों ने या तो उन्हें निकाल दिया है या फिर भारत में ही उसी कंपनी में काम करने का सुझाव दिया है.

नौकरियां छूटने के बाद कुछ पेशेवर लोगों को अमरीका में अपनी संपत्तियों को बेचने में भी मुश्किलें आ रही है.

उनके पास समय कम होता है और मकानों की सही कीमत के लिए वो इंतज़ार नहीं कर पाते.

मकानों की कीमत पहले से ही गिरी हुई है और उनके उपर चढ़ने में जो वक्त लगेगा वो उनके पास होता नहीं है.

और इसलिए ज़्यादातर लोग अपने घर, कार और अन्य सामान औने-पौने बेच कर, हज़ारों डॉलर का नुकसान उठाकर भारत लौट रहे हैं.

ऐसे भी कुछ मामले सामने आए हैं जब हज़ारों डॉलर के नुकसान और कर्ज़ नहीं चुका पाने के कारण कुछ भारतीय मूल के लोगों ने आत्महत्याएं तक की हैं.

लेकिन इस अफ़रा-तफ़री के माहौल में अमरीका की ज़िंदगी को अलविदा कहकर भारत जाने वालों में कुछ एक ऐसे भी हैं जो अपनी इच्छा से भारत वापस जा रहे हैं.

पल्लवी पडगिलवार और उनके पति 13 साल से न्यू जर्सी में रह रहे थे. दो छोटी बच्चियों समेत सभी लोग अमरीकी नागरिक भी हैं लेकिन अब वह भारत के पुणे शहर में वापस जाकर अपने परिवार के सदस्यों के साथ रहना चाहते हैं.

पल्लवी कहती हैं, अमरीका में रहकर बहुत मज़ा आया. लेकिन हमने तो पहले से ही तय कर लिया था कि 12 – 13 साल तक अमरीका में रहकर हम लोग वापस चले जाएंगे. अब बच्चे स्कूल जाना शुरू कर रहे हैं तो हम चाहते हैं कि हम अपने परिवार के पास भारत वापस चले जाएं. अगर हमारे परिवार के सभी सदस्य यहां होते तो हम कभी भी अमरीका छोड़कर भारत वापस नहीं जाते.

पल्लवी कहती हैं कि उनका परिवार अमरीका आता जाता रहेगा.

लेकिन बहुत से लोग जो मजबूरन अमरीका से भारत वापस जा रहे हैं उनके लिए अमरीका वापस आना इतना आसान न होगा.