पश्चिम बंगाल में एक और परियोजना बंद

बुद्धदेब भट्टाचार्य
Image caption पश्चिम बंगाल की वामपंथी सरकार के लिए इस फ़ैसले को एक और किरकिरी माना जा रहा है

पश्चिम बंगाल सरकार ने सोमवार को अपनी महात्वाकांक्षी आईटी टाउनशिप परियोजना को बंद करने का फ़ैसला किया है.

इस टाउनशिप में इंफ़ोसिस और विप्रो जैसी बड़ी आईटी कंपनियाँ अपनी इकाइयाँ स्थापित करने वाली थीं.

इससे पहले ज़मीन के विवाद के चलते ही टाटा को सिंगूर से नैनो कार बनाने की अपनी परियोजना को बंद करना पड़ा था और उसे बाद टाटा ने गुजरात में संयंत्र स्थापित करने का फ़ैसला किया था.

इससे पहले नंदीग्राम में भी सलेम समूह के विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईज़ेड) बनाने का विरोध हुआ था और वहाँ हिंसा की कई कार्रवाइयाँ हुई थीं.

माना जा रहा है कि आईटी टाउनशिप परियोजना को वेदिक विलेज रेसॉर्ट को लेकर उठे विवाद के बाद बंद करने का फ़ैसला किया गया है.

असमर्थता

सरकार के सूचना तकनीक (आईटी) विभाग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, "सरकार किसी भी ग़ैरक़ानूनी गतिविधि में शामिल नहीं होना चाहती और अब आईटी विभाग इस परियोजना पर आगे काम नहीं कर सकता."

इस बयान में कहा गया है, "ऐसी परिस्थितियों में हम इंफ़ोसिस और विप्रो को ज़मीन मुहैया करवाने के अपने वादे पर क़ायम नहीं रह पाएँगे इसलिए हमें उन्हें सूचित करना पड़ रहा है कि सरकार के लिए अब यह संभव नहीं है."

सरकार ने इन दोनों कंपनियों के साथ पिछले साल सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे जिसके तहत सरकार को दोनों कंपनियों को 90-90 एकड़ ज़मीन उपलब्ध करवाना था.

इस प्रस्तावित आईटी पार्क का निर्माण वेदिक रेसॉर्ट विलेज के पास होना था.

इस परियोजना के प्रबंधन और स्थानीय भू-माफ़िया के बीच साँठगाँठ होने के आरोपों के बाद वहाँ इसका विरोध शुरु हो गया था और गत 23 अगस्त को नाराज़ लोगों की भीड़ ने वहाँ आग लगा दी थी.

सरकार ने आईटी टाउनशिप परियोजना को बंद करने की घोषणा करते हुए कहा है कि आवास, भूसुधार, शहरी विकास और लोकनिर्माण जैसे विभाग इस परियोजना को बंद करने के पक्ष में थे.

आईटी विभाग के बयान में कहा गया है, "यदि इन विभागों में से कोई भी विभाग हमें सहयोग देने में असमर्थता व्यक्त करता है तो आईटी विभाग के लिए परियोजना पर आगे काम करना असंभव हो जाएगा."

इस परियोजना के बंद हो जाने को पश्चिम बंगाल की बुद्धदेब सरकार के लिए एक और किरकिरी माना जा रहा है.

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