नेताओं से 47 फ़ीसदी भारतीय ही संतुष्ट

Image caption भारतीय अर्थव्यवस्था वित्तीय संकट के बावजूद 6.1 प्रतिशत के विकास दर से बढ़ रही है

आर्थिक मंदी के दौर में सरकारों के कामकाज पर बीबीसी के 20 देशों में कराए सर्वेक्षण में पाया गया है कि 47 प्रतिशत भारतीय अपने नेताओं के कामकाज से संतुष्ट हैं.

सर्वेक्षण के मुताबिक 45 प्रतिशत भारतीय मानते हैं कि आर्थिक विकास का बोझ सभी लोगों को एक समान झेलना पड़ा है और इसके लाभ भी सभी को एक जैसे ही मिल रहे हैं. जिन बीस देशों में सर्वेक्षण हुआ उनके नागरिकों में से बड़ी संख्या में भारतीयों ने ऐसा मत व्यक्त किया. इसी के साथ सरकार की ओर से बैंको और वित्तीय संस्थाओं को दिए जाने वाली मदद को भारत में ख़ासा जनसमर्थन हासिल है.

बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के लिए ग्लोबस्कैन और अमरीका स्थित प्रोग्राम ऑन इंटरनेशनल पॉलिसी एटिट्यूड्स (पीआईपीए) ने 20 प्रमुख देशों में 22158 लोगों से बातचीत कर इस साल 19 जून और 17 अगस्त के बीच सर्वेक्षण कराया.

भारत के 1346 नागरिकों ने सर्वेक्षण में भाग लिया.

बहुमत आर्थिक मदद के पक्ष में

सर्वेक्षण के मुताबिक 59 प्रतिशत भारतीय मानते हैं कि सरकार अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन देने के लिए ख़र्च बढाए जबकि 52 प्रतिशत मानते हैं कि सरकार ये पैसा स्वच्छ तकनीक के लिए इस्तेमाल करे.

सर्वेक्षण में भाग लेने वाले भारतीयों में से 64 प्रतिशत बैंकों और 61 प्रतिशत औद्योगिक क्षेत्र को मदद दिए जाने के पक्ष में हैं.

महत्वपूर्ण है कि 57 प्रतिशत मानते हैं कि सरकार अर्थव्यवस्था पर नियंत्रण बढ़ाए.

जहाँ वित्तीय मंदी के दौरान भारतीय नेताओं के कामकाज से 47 प्रतिशत लोग संतुष्ट हैं वहीं अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के काम से 45 प्रतिशत, बैंक अधिकारियों के काम से 45 प्रतिशत, अमरीकी नेताओं के काम से 37 प्रतिशत और जी-20 देशों के काम से 49 प्रतिशत भारतीय संतुष्ट नज़र आए.

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