एयरटेल और एमटीएन के विलय पर बातचीत

भारती-एयरटेल
Image caption भारती-एयरटेल भारत की एक बड़ी मोबाइल फ़ोन कंपनी है

भारत की एक बड़ी मोबाइल फ़ोन कंपनी भारती-एयरटेल और दक्षिण अफ्रीका की एमटीएन मोबाइल फ़ोन कंपनियों को मिलाकर एक कंपनी बनाने के लिए बातचीत हो रही है.

अगर ये दोनों कंपनियाँ मिलकर एक बन जाती हैं तो उससे जो कंपनी बनेगी वो दुनिया की तीसरी ऐसी बड़ी कंपनी होगी जो मोबाइल टेलीफ़ोन सेवाएँ दे रही हैं.

अभी जिस योजना पर बातचीत हो रही है उसमें व्यवस्था है कि एमटीएन भारती-एयरटेल में 36 प्रतिशत भागीदारी ख़रीदेगी जबकि भारती-एयरटेल दक्षिण अफ्रीकी मोबाइल फ़ोन कंपनी एमटीएन में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी ख़रीदेगी.

दोनों ही पक्ष इस सौदे के क़ानूनी और तमाम अन्य पहलुओं पर गहन बातचीत कर रहे हैं.

दक्षिण अफ्रीका के वित्त मंत्रालय का कहना है कि अगर यह सौदा हो जाता है तो इससे बहुत सी कारोबारी संभावनाएँ निकल सकती हैं और इसमें दोनों कंपनियों के संसाधनों का ज़्यादा सही तरीक़े से इस्तेमाल हो सकेगा.

बातचीत

जिन मुद्दों पर बातचीत हो रही है उनमें एक ये भी है कि दोनों कंपनियों को मिलाने के बाद जो कंपनी बनेगी क्या उसे भारतीय शेयर बाज़ार और दक्षिण अफ्रीका के शेयर बाज़ार दोनों में ही दर्ज कराया जाए या नहीं.

ख़बरों के अनुसार दक्षिण अफ्रीका सरकार चाहती है कि ऐसी ही क़दम उठाया जाए यानी उसे दोनों देशों के शेयर बाज़ारों में पंजीकृत कराया जाए.

भारत सरकार इस तरह की इजाज़त नहीं देती है यानी कोई कंपनी एक से ज़्यादा देशों के शेयर बाज़ारों में पंजीकृत नहीं हो सकती, जबकि दक्षिण अफ्रीका सरकार ने ऐसा प्रावधान कर रखा है.

दक्षिण अफ्रीका के वित्त मंत्रालय ने एक वक्तव्य जारी करके कहा है, "भारत की इस बड़ी कंपनी भारती-एयरटेल और दक्षिण अफ्रीका की बड़ी कंपनी एमटीएन के एक साथ मिलने से बहुत बड़ी संभावनाएँ नज़र आती हैं. अगर ये कंपनियाँ मिलती हैं तो उसमें तकनीकी क्षमता, हुनर, कुशलता और अन्य क्षमताओं को भी मिलाया जाएगा जिससे दोनों ही देशों को फ़ायदा होगा."

वक्तव्य में कहा गया है, "हमें एमटीएन से आवेदन मिला जिसमें शेयर बाज़ार संबंधित अनेक नियम-क़ानूनों में ढिलाई देने का अनुरोध किया गया है और इस संबंध में उचित प्रक्रिया अपनाई जा रही है."

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