टाटा को उत्तराधिकारी की तलाश

रतन टाटा
Image caption रतन टाटा कहते हैं कि अगला मुखिया 'बाहरी' भी हो सकता है.

भारत के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा समूह को रतन टाटा के उत्तराधिकारी की तलाश है.

ये बात कोई और नहीं बल्कि कंपनी के मुखिया रतन टाटा ख़ुद कह रहे हैं.

उन्होंने अमरीकी पत्रिका वॉल स्ट्रीट जर्नल को दिए इंटरव्यू में कहा है, "मेरे बाद टाट समूह की कमान कौन संभालेगा, हम इसे तय करने की प्रक्रिया में हैं. इसमें कुछ विदेशी सलाहकारों की मदद ली जा रही है और खोज जारी है."

नमक से लेकर स्टील बनाने वाली कंपनी के चेयरमैन रतन टाटा 71 साल के हो गए हैं. वो कहते हैं कि उत्तराधिकारी चुनने के लिए किसी तरह का पूर्वाग्रह उनके मन में नहीं है.

बकौल रतन टाटा उनका उत्तराधिकारी टाट समूह के भीतर से भी हो सकता है या बाहर का कोई व्यक्ति भी.

उत्तराधिकारी

टाटा समूह में 98 कंपनियाँ हैं जिनमें से 27 शेयर बाज़ार में सूचीबद्ध हैं. इनमें टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, टाटा पावर और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी टीसीएस प्रमुख है.

अभी तक रतन टाटा के परिवार के किसी व्यक्ति का नाम उनके उत्तराधिकारी के तौर पर आगे नहीं आया है.

रतन टाटा कहते हैं, "अगर दमदार उम्मीदवार भारतीय नागरिक हो तो आसानी होगी. लेकिन जब हमारा 65 फ़ीसदी राजस्व बाहर से आता है तो वह व्यक्ति बाहर का भी हो सकता है."

टाटा समूह की कंपनियों में लगभग साढ़े तीन लाख लोग काम करते हैं और इसका सालाना राजस्व लगभग 71 अरब डॉलर है.

यह पूछे जाने पर कि मौजूदा आर्थिक स्थिति में अपने को ढालने के लिए वे क्या ख़ास कर रहे हैं, रतन टाटा का जवाब था- मेरा मानना है कि भारत और पश्चिमी देश मंदी के अलग तरह से निकल रहे हैं.

उन्होंने कहा कि बाज़ार में नक़दी भी है और बाज़ार संतुलित तरीक़े से मंदी से उबर भी रहा है. बैंक भी अच्छी स्थिति में हैं और ऋण के क्षेत्र में भी अच्छा सुधार हुआ है.

रतन टाटा के मुताबिक़ अमरीका में हल्का सुधार है जबकि ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देश धीरे-धीरे मंदी से उबर रहे हैं.

अपने उत्तराधिकारी की तलाश के बारे में रतन टाटा ने कहा, "हम संगठन के अंदर और बाहर दोनों जगह इसकी तलाश कर रहे हैं. मुझे उम्मीद है कि उत्तराधिकारी जो भी होगा, वो हमारे मूल्यों और सच्चाई को आगे रखकर काम करेगा. मुझे यह भी उम्मीद है कि वो उस रास्ते पर चलेगा, जिस पर चलते हुए हमने कंपनी की प्रगति के लिए कोशिश की है."

रतन टाटा ने कहा कि जहाँ तक ये सवाल है कि उत्तराधिकारी कौन होगा, वो पुरुष भी हो सकता है और महिला भी, वो बाहर का हो सकता है और संगठन के अंदर का भी.

कमज़ोरी

उन्होंने कहा कि अगर उत्तराधिकार का उम्मीदवार भारतीय नागरिक हो, तो यह निश्चित रूप से आसान होगा लेकिन चूँकि हमारे राजस्व का 65 प्रतिशत हिस्सा बाहर से आता है, वो प्रवासी भी हो सकता है.

रतन टाटा से यह पूछा गया कि अगर वे भारतीय व्यावसायिक महौल में कोई एक चीज़ बदलना चाहें, तो वह क्या होगा, इस पर उनका कहना था, "भारत में हमारे पास जो चीज़ नहीं है और जिसके कारण हमारी कई नीतियाँ अप्रभावी हो जाती हैं, वो है नीतियों को लागू करने में हमारी कमज़ोरी."

यह पूछे जाने पर कि क्या निर्माण के क्षेत्र में भारत को इस तरह खड़ा होना चाहिए, जिससे चीन को चुनौती दी जा सके, रतन टाटा ने कहा कि वे नहीं मानते कि भारत ऐसा करेगा और न ही भारत को ऐसा करना चाहिए कि वह एक स्रोत के रूप में चीन को पूरी तरह ख़त्म कर दे.

उन्होंने कहा, "निर्माण के क्षेत्र में चीन बहुत शक्तिशाली स्रोत है. मेरा मानना है कि भारत चीन से बहुत कुछ सीख सकता है. मुझे लगता है कि चीन बदलेगा."

रतन टाटा के मुताबिक़ आगे चलकर चीन इस क्षेत्र में और बढ़ेगा. लेकिन उसके पास उतने स्रोत नहीं होंगे. इसलिए भारत के पास यह मौक़ा होगा कि वह इस ख़ाली स्थान को भरे.

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