जापान एयरलाइंस ने घुटने टेके

जापान एयरलाइंस
Image caption जापान एयरलाइंस पर मंदी के कारण 25 अरब 60 करोड़ डॉलर का कर्ज़ चढ़ गया है

एशिया की सबसे बड़ी विमान सेवा जापान एयरलाइंस ने ख़ुद को दीवालिया घोषित करने के लिए आवेदन किया है.

जापान एयरलाइंस के शेयर मुँह के बल जा गिरे हैं और कंपनी की कुल कीमत घटकर 15 करोड़ डॉलर रह गई है जो कि एक नए जंबो जेट की की़मत से भी कम है.

जापान के इतिहास में इस घटना को सबसे बड़ी व्यावसायिक नाकामियों में गिना जा रहा है.

कंपनी के दीवालिया होने से लगभग 15 हज़ार नौकरियाँ जाएँगी जो कंपनी के कुल कर्मचारियों का एक तिहाई हिस्सा है.

जापानी मीडिया के अनुसार कंपनी के बोर्ड के सभी सदस्यों ने भी इस्तीफ़ा देने का फ़ैसला किया है.

कंपनियों को उबारनेवाली जापान की एक सरकार समर्थित संस्था का कहना है कि वह एयरलाइंस को उबारने के लिए तीन खरब येन या तीन अरब 30 करोड़ डॉलर ख़र्च कर सकती है.

जापान सरकार का कहना है कि जापान एयरलाइंस की उड़ानों पर कंपनी के जीर्णोद्धार के काम से कोई असर नहीं पड़ेगा.

मंदी का असर

आर्थिक मंदी के दौर में दूसरी कई अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं के साथ-साथ जापान एयरलाइंस पर भी भारी असर पड़ा है.

कंपनी के ऊपर 25 अरब 60 करोड़ डॉलर का कर्ज़ है.

जापान की एक निवेश कंपनी डाइवा एस बी इंस्वेटमेंट्स के अधिकारी कोइचि ओगावा का कहना है कि जापान एयरलाइंस के दीवालिया होने की घटना से कई सबक़ मिलते हैं.

कोइची ओगावा ने कहा,"यह दर्शाता है कि कोई चीज़ चाहे कितनी भी बड़ी क्यों ना हो, वह गिर सकती है".

वे कहते हैं,"ये घटना ये भी दिखाती है कि सरकार हरदम किसी कंपनी का भार नहीं उठाया करती, उसने अब साफ़ कर दिया है कि घाटे में चल रही कंपनियाँ बंद हो जाएँगी."

अब सरकार के समर्थन से जापान एयरलाइंस के विमान तो उड़ते रहेंगे मगर कंपनी के निवेशकों की अच्छा-ख़ासी रकम डूब जाएगी.

इस बीच अमरीकी विमान सेवा डेल्टा एयर लाइन्स ने जापान एयरलाइंस के समर्थन में एक बयान जारी किया है और उसके सामने एक प्रस्ताव भी रखा है.

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