शेयर बाज़ारों में भारी गिरावट

Image caption ओबामा ने बैंकों के लिए कड़े नियामक प्रावधान के संकेत दिए.

अमरीकी बैंकों को कड़े नियामक क़ानून के दायरे में लाने के प्रस्ताव का असर दुनिया भर के शेयर बाज़ारों में देखा जा रहा है.

गुरुवार को अमरीकी शेयर बाज़ार डाउ जोंस, नैस्डैक में भारी गिरावट आई जिसके बाद शुक्रवार को जब एशिया शेयर बाज़ार खुले तो वहां भी बिकवाली तेज़ हो गई.

जापान का सूचकांक निक्केई तीन फ़ीसदी से ज़्यादा गिर चुका है. चीन, ताइवान, कोरिया और भारत में भी ज़बर्दस्त गिरावट दर्ज की गई है.

इन सभी देशों के मुख्य शेयर सूचकांक दो फ़ीसदी से ज़्यादा की गिरावट के साथ कारोबार कर रहे हैं.

भारत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का मुख्य सूचकांक सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में ही एक समय 400 अंकों से ज़्यादा की गिरावट के साथ 16 हज़ार 600 पर आ गया.

अगर पिछले तीन दिनों से जारी गिरावट को जोड़ दें तो सेंसेक्स में एक हज़ार अंकों की गिरावट आ चुकी है.

बैंकों पर दबाव

सभी देशों में सबसे ज़्यादा गिरावट बैंकिंग शेयरों में देखी जा रही है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने गुरुवार को दिए बयान में कहा था कि वे बैंकों के आकार और उनके कारोबार को सीमित करने के लिए नए नियामक प्रावधान लाएंगे.

उन्होंने कहा कि इसका मकसद वर्ष 2008 में आई मंदी जैसी स्थिति को रोकना है, लेकिन वित्तीय बाज़ार के विश्लेषकों ने इसकी आलोचना की है.

ओबामा ने कहा कि कई बैंकों ने जनता के जमा पैसे का निवेश जहां-तहां कर दिया जिससे वित्तीय संकट की शुरुआत हुई और इस तरह स्थिति दोबारा पैदा न हो, इसे सुनिश्चित करने के लिए बैंकों की ज़िम्मेदारी तय करनी होगी.

उनकी इस घोषणा के बाद न्यूयॉर्क का डाउ जोंस सूचकांक दो प्रतिशत गिरा है. जेपी मॉर्गन चेज़ और बैंक ऑफ अमेरिका के शेयर भी गिरे हैं.

संबंधित समाचार