पाँच साल बाद भी अधूरे हैं वादे

भारत में जनता के हाथों बने पहले रेलवे स्टेशन का प्रयोग करने वाले ग्रामीण रेल प्रशासन से मायूस हैं.

राजस्थान के शेखावाटी अंचल के बलवंतपुरा-चेलासी में अपने दम पर स्टेशन का निर्माण कर रेलवे को सौंपने वाले लोगों का कहना है कि रेलवे अब तक भी उन्हें बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध नहीं करा पाया है.

इस रेलवे स्टेशन ने अपने काम काज के पांच साल पूरे कर लिए है.

बलवंतपुरा के नरेन्द्र कहते है, “जनता ने अपने बल बूते पर ये स्टेशन बनाया, अब रेल गाड़ियाँ आती हैं और यात्री सवार होते है. मगर रेलवे वहां रेल कर्मचारी तैनात करने को तैयार नहीं है. हर रोज़ कोई आठ रेलगाड़ियाँ इस स्टेशन पर रुकती हैं. मगर टिकट विंडो नहीं है, न ही यात्रियों के लिए कोई इंतजाम है. हमें इस रेल बजट से बहुत उम्मीद थी.”

लोगों ने ये स्टेशन तब बनाया था जब नेताओं ने इस काम में कोई रूचि नहीं ली.

इस स्टेशन के निर्माण की मुहिम छेड़ने वाले बजरंग जांगिड कहते है,''इसमें हर किसी ने अपनी शक्ति के मुताबिक योगदान किया. किसी ने पैसा दिया तो कोई सामग्री लेकर आया. बड़ी तादाद में लोगों ने अपना पसीना बहाया और इस स्टेशन का निर्माण किया. ग्रामीणों ने प्लेटफ़ॉर्म और वहां एक इमारत बना रखी है मगर रेलवे ने इस पर कोई पैसा खर्च नहीं किया.''

वो कहते हैं, ''हमारी इच्छा है कि रेलवे यहाँ छाया पानी का इंतजाम करे और प्लेटफ़ॉर्म पर एक शेड भी बनाए. हम इस स्टेशन को गुलज़ार देखना चाहते है.''

ये स्टेशन ऐसे दौर में बना था जब लोग अपनी मांगे मंज़ूर कराने के लिए सरकारी संपत्ति को जला कर राख कर देते थे.

ऐसे में ग्रामीणों को उम्मीद थी कि रेलवे जनता के इस स्टेशन को सुविधाओं से नवाज़ कर ऐसे प्रयासों को सम्मान देगी. मगर अब गाँव वाले थोड़ा मायूस हुए हैं.

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