'सबसे बेहतर काम करने की चाह'

चंदा कोचर
Image caption चंदा कोचर भारत के दूसरे सबसे बड़े बैंक आईसीआईसीआई की एमडी और सीईओ हैं

महिला दिवस पर बीबीसी ने बात की आईसीआईसीआई की प्रबंध निदेशक चंदा कोचर से. कोचर भारत के एक बड़े प्राइवेट बैंक की शीर्ष अधिकारी हैं और अपने परिवार एवं पेशे में सही सुतंलन बनाने की ज़रुरत पर ज़ोर देतीं हैं. चंदा कोचर से बात की बीबीसी संवाददाता अनुभा रोहतगी ने.

चंदा जी बैंकिंग जैसे क्षेत्र में आने का ख़्याल आपके मन मैं कैसे आया?

मेरी रुचि हमेशा वित्तीय मामलों में रही है. पढ़ाई के दिनों में ही मेरा रुझान इस तरफ़ था. एमबीए की पढ़ाई समाप्त करने के बाद मैंने शुरुआती दिनों में ही आईसीआईसीआई में नौकरी के लिए इंटरव्यू दिया. मैंने अपने चयन बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

प्लेबैक आपके उपकरण पर नहीं हो पा रहा

लेकिन क्या बैंकिंग हमेशा से ही आपके लिए पहली पसंद रही है, क्योंकि जब आपने करियर की शुरुआत की थी तब बैंकिंग में उतनी महिलाएं नहीं थीं.

उस समय तो बैंकिंग को चुनने से ज़्यादा ये एक सही संस्था में काम करने की बात थी. मैं तो वित्त से जुड़ा कोई भी काम करने के लिए तैयार थी. प्लेसमेंट शुरु होने से पहले ही मुझे ये ऑफ़र मिला और मैंने इसे स्वीकार कर लिया.

आपने एक ट्रेनी के तौर पर शुरुआत की और आज आप आईसीआईसीआई की सीईओ और एमडी हैं. क्या इस यात्रा में कोई बाधाएं भी आईं?

मैं ये नहीं कहूंगी कि कोई बाधाएं आईं लेकिन ये भी नहीं कहूंगी कि ये एक आसान सफर था. मैं कहूंगी ये पच्चीस साल की कड़ी मेहनत है. इस सफ़र में कई चुनौतियां आईं, कई अच्छे लम्हें आए. कामकाजी ज़िंदगी में अवसर भी मिलतें हैं और चुनौतियां भी आती रहतीं हैं लेकिन अगर आप जी लगाकर काम करें तो आप कामयाब हो ही जाएंगें.

क्या पुरुषों के मुक़ाबले में महिलाओं को अपने करियर में ज़्यादा कड़ी मेहनत करनी पड़ती है?

ये सच बात है. महिलाओं को कई किरदार निभाने पड़ते हैं. महिला को एक मां, पत्नी, बहन, बेटी, बहू सभी रोल निभाने पड़तें हैं. इसलिए उसके लिए ये कड़ी मेहनत का काम होता है. मैं इस बात से कतई इंकार नहीं करुंगी. मैं तो ये कहूंगी कि एक तरह से महिलाएं 48 घंटे का काम 24 घंटे में करने की कोशिश करतीं हैं. लेकिन क्या घर और कामकाज दोनों का सफलता से कर पाना संभव है? मैं कहूंगी हां.

सफल होने के लिए महिलाओं में क्या ख़ूबियां होनीं चाहिएं?

एक तो ये कि जो आपको जीवन में करना है उसके प्रति पूरा ध्यान लगाए रखें. दूसरा बढ़िया टाइम मैनेजमेंट. बेकार का काम करने के लिए एक मिनट नहीं होना चाहिए. तीसरा कौन-सा काम कब करना, इसे तय करके चलें क्योंकि आपको परिवार और कामकाज दोनों पर ध्यान देना है लेकिन एक वक़्त में तो एक ही काम हो सकता है इसलिए सही वक़्त पर सही काम करें. उदाहरण के तौर आपको पता होना चाहिए कि अपने बच्चे के स्कूल के कार्यक्रम और बोर्ड मीटिंग में से क्या चुनना है. परिस्थितियों के मुताबिक आप कभी बोर्ड मीटिंग चुन सकते हैं तो कभी बच्चे का स्कूल का कार्यक्रम. और आख़िर में महिलाओं को मल्टीटास्किंग यानि एक साथ बहुत सारे काम करने पड़ते हैं.

आपको व्यक्तिगत और कामकाजी ज़िंदगी किस चीज़ से प्रेरणा मिलती है?

मुझे हमेशा बेहतरीन करने का जुनून रहता है. मैं जो भी काम करती हूं उसे मैं बढ़िया तरीके से करना चाहती हूं, दूसरों से भी बढ़िया तरीके से.

महिलाओं के लिए आपका क्या संदेश होगा?

मैं कहूंगी कि नौजवान महिलाओं को ये बात अपने मन से निकाल देनी होगी कि वो अपना करियर और परिवार दोनों को एक साथ नहीं चला सकतीं. मुझे लगता है कि ये भावना कि इन दोनों को एक साथ मैनेज नहीं किया जा सकता काफ़ी प्रबल है लेकिन ऐसा है नहीं. दूसरी बात ये कि क्योंकि आपको घर और दफ़्तर दोनों को संभालना तो इसे आप बोझ ना समझें, इसे एक अवसर मानकर चलें.

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