नियंत्रण रेखा के आर-पार बढ़ता भारत-पाक व्यापार

नवंबर 2008 में जम्मू कश्मीर में भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा के आर पार शुरू हुआ व्यापार कई मुश्किलों के बावजूद न केवल चल रहा है बल्कि लोकप्रिय होने के साथ साथ रोज़गार का साधन भी बन गया है.

लोगों की माँग और भारत-पाकिस्तान के बीच विश्वास बहाली के कदम के रूप में इस व्यापार की शुरुआत हुई.

उस समय इस व्यापार को लेकर इतना उत्साह था कि कई मसलों पर एकमत न होने पर भी इसे शुरू कर दिया गया.

व्यापार राज्य में दो जगहों से नियंत्रण रेखा के आर पार होता है - जम्मू में पुँछ ज़िले के चकां दा बाग़ और कश्मीर घाटी में बारामुल्ला ज़िले के सलामाबाद.

पुँछ में व्यापारी संगठन के नेता पवन आनंद ने बीबीसी को बताया की अब यह व्यापार कई लोगों के लिए रोज़गार का साधन बन गया है.

उनका कहना है, "यहाँ पुँछ में करीब 200 व्यापारी इस व्यापार से जुड़े हैं और इतने ही संख्या सलामाबाद में है. 400 - 500 परिवार व्यापार से जुड़ चुके हैं. लोगों का जो चरमपंथ की तरफ़ रूझान था या ध्यान था, अब इस तरफ लग गया है."

मुश्किलें भी कम नहीं

लेकिन पवन आनंद कहते हैं कि इस व्यापार में कई मुश्किलें आ रही हैं जिस पर दोनों भारत और पाकिस्तान कि सरकारें ध्यान नहीं दे रही.

उनका कहना है, "इस व्यापार में हर कदम पर कठनाई है. ख़ासकर टेलीफ़ोन और बैंकिंग सुविधाओं का न होना, बुनियादी सुविधाओं का अभाव, सप्ताह में केवल दो ही दिन व्यापार आदि."

जब यह व्यापार शुरू हुआ था तब यह सहमति नहीं बन पाई थी कि कौन सी मुद्रा का प्रयोग होगा. डॉलर का इस्तेमाल तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार में होता है.

कश्मीर के दो भागों में व्यापार को अंतरराष्ट्रीय व्यापार का रूप दोनों भारत और पाकिस्तान को स्वीकार नहीं था.

इस लिए व्यापार की शुरुआत बार्टर सिस्टम या सामान के बदले सामान से हुई. परंतु जब धीरे-धीरे व्यापार बढ़ा तो कठिनाइयाँ भी बढ़ती चली गईं.

अब इन्हें सुलझाने के लिए भारतीय और पाकिस्तानी अधिकारी अप्रैल मैं दिल्ली में मुलाकात कर रहे हैं.

जम्मू कश्मीर के उद्योग और वाणिज्य मंत्री सुरजीत सिंह सलाथिया उम्मीद करते हैं कि इस बातचीत से कई मसलों का हल निकल आएगा और राज्य सरकार को जो कदम उठाने हैं वो भी जल्द उठाए जा रहे हैं.

बीबीसी से बातचीत में मंत्री ने माना कि टेलीफ़ोन सुविधाएं व्यापार के लिए अहम हैं.

उन्होंने कहा, "हमने भारत सरकार से फ़ोन का मसला हल करने को कहा है. यह बहुत ही ज़रूरी है क्यूंकि जब माल दूसरी तरफ (पाकिस्तान) पहुँचता था तो कोई सूचना नहीं मिलती थी. इसके लिए हम अब कुछ व्यापारियों और उनके संगठनों को यह सुविधा जल्द दे रहे है."

उनका कहना हैं, बैंकिंग सेवा किसी भी व्यापार के लिए ज़रूरी है. हमने गृह मंत्रालय को लिखा हैं कि जम्मू कश्मीर बैंक की शाखा पाकिस्तान की तरफ हो और वहाँ की शाखा इस तरफ़ हो ताकि लोगों को बैंकिंग सुविधाएं हासिल हों."

मंत्री ने व्यापारियों कि इस मांग को भी जायज़ ठहराया कि सप्ताह में दो दिन व्यापार को चार दिन किया जाए.

और बढ़ने की उम्मीद

सुरजीत सिंह ने कहा कि दोनों देश इस पर सहमत हैं और आगामी बैठक के बाद यह सप्ताह में चार रोज़ कर दी जाएगी. इसके अलावा राज्य के वाणिज्य मंत्री ने बताया कि व्यापार की वस्तुओं की सूची में 36 और बढ़ाई जा रही हैं.

मंत्री ने कहा कि सही स्कैनिंग मशीन न होने से पाकिस्तान से आ रही गाड़ियों की जाँच बहुत धीमे होती है जिससे बहुत ज़्यादा समय लग जाता है.

वे कहते हैं, "हमने यह भी प्रस्ताव रखा है कि जैसे तुर्की में ट्रक स्कैनर मशीनें होती हैं वैसी ही लगाई जाएँ ताकि पूरा ट्रक और सामान जल्दी से चेक हो जाए. इससे काम तेज़ी से हो जाएगा और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा".

सलाथिया ने बताया कि दोनों व्यापार केंद्रों में बुनियादी सुविधाएँ और ढांचे को भी बढ़ाया जा रहा है.

अभी तक इस व्यापार में भारत से १०० करोड़ का सामान पाकिस्तान गया है और करीब १५० करोड़ इस तरफ़ आया है.

इस दौरान एक मामला ऐसा भी हुआ है जिसमें आरोप लगाया गया कि व्यापार से जुटे धन में से लाखों रूपए हवाला के ज़रिए चरमपंथी संगठनों को दिए गए.

इस पर मंत्री का कहना था, "उस मामले के सामने आने के बाद सख्ती ज़्यादा कर दी गई है ताकि इस व्यापार का पैसा हमारे खिलाफ़ इस्तेमाल न हो. उस मामले की जांच पुलिस कर रही है और उस कंपनी के खिलाफ एफ़आईआर भी दर्ज कर दिया गया है. इसके बाद कोई और मामला सामने नहीं आया है."

जम्मू में चेम्बर ऑफ़ कॉमर्स और इंडस्ट्री के प्रमुख वाईवी शर्मा कहते हैं, "व्यापार के मापदंड से देखा जाए तो यह सही व्यापार नहीं है. यह तो केवल एक विश्वास बहाली का कदम है.जब व्यापारियों ने व्यापार करना होता है तो वो रास्ते निकाल लेते हैं. यह भी वैसा ही है."

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