अदालत में तय होगा बीमा कंपनियों का मामला

यूलिप से निवेशक बीमा के लाभ के साथ-साथ शेयर बाज़ार में भी निवेश कर सकते हैं

भारत सरकार ने देश की दो नियमन संस्थाओं सेबी और इरडा से कहा है कि वे 14 बीमा कंपनियों पर यूनिट लिंक्ड बीमा उत्पादों या यूलिप के कारोबार पर सेबी की पाबंदी के मामले में पाबंदी से पहले वाली स्थिति बनाए रखें.

यूलिप स्कीमों के नियमन के अधिकार को लेकर शेयर कारोबार की निगरानी करनेवाली संस्था सेबी और बीमा कारोबार की निगरानी करनेवाली संस्था इरडा के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी.

अब भारतीय वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि इस बारे में फै़सला एक अदालत करेगी और तबतक यथास्थिति को बनाए रखा जाएगा.

प्रणब मुखर्जी ने पत्रकारों से कहा,"किसी भी तरह के भ्रम को दूर करने के लिए और बाज़ार के सुचारू संचालन के लिए दोनों नियामक संस्थाएँ एक समुचित न्यायालय के फ़ैसले को मानने के लिए तैयार हो गई हैं."

किसी भी तरह के भ्रम को दूर करने के लिए और बाज़ार के सुचारू संचालन के लिए दोनों नियामक संस्थाएँ एक समुचित न्यायालय के फ़ैसले को मानने के लिए तैयार हो गई हैं

प्रणब मुखर्जी

यूलिप ऐसे बीमा उत्पाद हैं जिनमें इसे जारी करनेवाली कंपनियाँ ग्राहकों से जमा करवाए गए प्रीमियम का अधिकतर हिस्सा शेयरों, म्युचुअल फ़ंड और बॉण्ड में लगा दिया करती हैं.

शेयर और वित्तीय बाज़ार पर निगरानी रखनेवाली संस्था - भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी सेबी - ने इसपर आपत्ति करते हुए पिछले शुक्रवार नौ अप्रैल को 14 जीवन बीमा कंपनियों पर यूलिप के माध्यम से पैसा लेने पर पाबंदी लगा दी थी.

इसके एक दिन बाद ही बीमा क्षेत्र पर निगरानी रखनेवाली संस्था - विनियामक और विकास प्राधिकरण यानी इरडा - ने इन 14 कंपनियों से सेबी के आदेश की परवाह ना कर सामान्य काम करते रहने के लिए कहा.

टकराव की स्थिति पैदा होने के बाद वित्त मंत्रालय को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा और वित्त सचिव अशोक चावला ने सेबी प्रमुख सी बी भवे और इरडा चेयरमैन जे हरि नारायण के साथ अलग-अलग बैठकें की.

सेबी ने जिन जीवन बीमा कंपनियों के ख़िलाफ़ पाबंदी लगाई है वो कंपनियाँ हैं – एसबीआई लाइफ़, आईसीआईसीआई प्रु़डेंशियल, टाटा एआईजी, एगॉन रेलिगेयर लाइफ़, अविवा लाइफ़, बजाज एलायंज़, भारती एएक्सए, बिरला सनलाइफ़, एचडीएफ़सी स्टैंडर्ड लाइफ़, आइएनजी वैश्य लाइफ़, कोटक महिंद्रा ओल्ड म्युचुअल लाइफ़, मैक्स न्यू यॉर्क लाइफ़, मेटलाइफ़ इंडिया और रिलायंस लाइफ़.

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