आ अब लौट चलें...

श्रीनगर में ऐजिस कॉल सेंटर का ट्रेनिंग रुम
Image caption श्रीनगर में ऐजिस कॉल सेंटर का ट्रेनिंग रुम

भारत प्रशासित कश्मीर में हिंसा के कारण पिछले कुछ वर्षों में कई पढ़े-लिखे प्रशिक्षित लोग राज्य छोड़कर अन्य जगहों पर नौकरी करने को मजबूर हुए थे. लेकिन श्रीनगर में एक कॉल सेंटर के खुलने के बाद ऐसे कई लोग राज्य में लौटने लगे हैं.

ऐसे ही एक युवक हैं आदिल फ़ारूक़ डार जिन्हें कश्मीर विश्वविद्यालय में पढ़ने के बाद नौकरी की तलाश में अपना शहर छोड़ना पड़ा था. वे बताते हैं कि जब वे दिल्ली से सटे गुड़गांव में काम करते थे, तब भी उनके दिल और दिमाग़ पर हमेशा श्रीनगर की यादें छाई रहतीं थीं.

जब उन्होंने श्रीनगर में एक कॉल सेंटर खुलने की बात सुनी तो उनकी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा. उन्होंने कॉल सेंटर खोलने वाली कंपनी ऐजिस से संपर्क किया और पहुंच गए अपने नाते-रिश्तेदारों और पुराने दोस्तों के बीच श्रीनगर में.

ऐजिस एक बहुराष्ट्रीय कंपनी है जिसने श्रीनगर में अपना बिज़नेस प्रोसेस ऑउटसोर्सिंग (बीपीओ) यानी कॉल सेंटर खोला है. इसी कारण बीपीओ उद्योग से जुड़े पेशेवर कश्मीरी युवकों को वापिस अपने शहर में लौटने का एक अवसर मिल गया है.

इस कॉल सेंटर से एक बड़ी टेलीकॉम कंपनी की ‘क्लाइंट सर्विसिंग’ शुरु होने जा रही है. ऐजिस ने अब तक क़रीब 160 लोगों की भरती की है और इनमें उच्च प्रबंधन और नेतृत्व वाली जगहों पर ऐसे लोग भी हैं जिन्हें काम की तलाश में घाटी को छोड़ना पड़ा था.

'इच्छा है कि हालात सुधरें'

घाटी छोड़कर और जगहों पर नौकरियाँ करने गए लोग वापस क्यों आना चाहते हैं, इसके जवाब में आदिल डार कहते हैं, "मुझे लगता है कि अपने परिवार के क़रीब रहकर काम करने का ये सुनहरा मौक़ा है."

आदिल डार भारत प्रशासित कश्मीर में आए दिन होने वाले राजनीतिक प्रदर्शनों और हिंसा के बारे में कहते हैं, "मेरे फ़ैसले पर इस बात का कोई प्रभाव नहीं पड़ा. हम चाहते हैं कि हालात सुधरें और इसके लिए क़दम भी हमें ही उठाने पड़ेंगे."

इसी तरह दिल्ली में विप्रो जैसी कंपनियों में क़रीब आठ साल काम कर सरफ़राज़ एजिस के मानव संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी हैं. इन्होंने स्कूल तक की शिक्षा श्रीनगर में हासिल की थी.

उसके बाद की पढ़ाई उन्होंने दिल्ली में की और एमबीए के बाद विप्रो में नौकरी करने लगे. सरफ़राज़ कहते हैं, "मैं हमेशा श्रीनगर में किसी नौकरी की तलाश में रहता था और जैसे ही मुझे पहला मौक़ा मिला, मैंने तुरंत हामी भर दी. सरफ़राज़ इसे स्थानीय और राज्य से बाहर काम कर रहे कश्मीरी युवाओं के लिए एक बड़ा अवसर मानते हैं."

सरफ़राज़ कहते हैं कि घाटी के राजनीतिक हालात माहौल का उनके काम पर कोई असर नहीं पड़ रहा.

ऐजिस के ग्लोबल सीईओ और प्रबंध निदेशक अपारुप सेनगुप्ता देश के अन्य हिस्सों से श्रीनगर लौटने वाले कश्मीरी मूल के कर्मचारियों की तुलना क़रीब पंद्रह साल पहले विदेशों से भारत लौटने वाले लोगों से करते हैं.

शुरु में कश्मीरी युवकों की श्रीनगर लौटने की चाहत से हैरान हुए सेनगुप्ता ने बीबीसी को बताया, "ये ठीक वैसे ही है जैसे विदेशों में बसे भारतीयों ने पंद्रह साल पहले भारत का रुख़ किया था. तब लोग कहते थे कि भारत में कुछ नहीं हो सकता लेकिन अब देखिए...पहले देश के पिछड़े राज्यों के पास अवसर कम थे लेकिन अब सब बदल रहा है."

'शब्द नहीं हैं'

अपारुप सेनगुप्ता कहते हैं कि ये कॉल सेंटर ‘कश्मीर का, कश्मीरियों द्वारा और कश्मीर के लिए’ है.

ऐजिस के एशिया-पैसेफ़िक क्षेत्र के अध्यक्ष सुधीर अग्रवाल कहते हैं कि ऐसे कॉल सेंटर स्थापित होने से लोगों को रोज़गार मिलेगा और स्थिरता आएगी क्योंकि फिलहाल घाटी में रोज़गार के अवसरों की काफ़ी कमी है.

और जैसा कि आदिल फ़ारुक़ डार ने बीबीसी को बताया, "आपको ईमानदारी से बताऊं कि मेरे पास अपनी ख़ुशी का इज़हार करने के लिए शब्द नहीं हैं. ये एक मानवीय स्वभाव है कि अगर आपको अपने परिवार और शहर में काम करने का मौक़ा मिले तो इससे बढ़ कर कुछ नहीं हो सकता."

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