तंज़ानिया का फ़ैसला, जयपुर में चिंता

तेंजानाइट
Image caption तंज़ानिया ने तेंज़ानाइट के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है

हॉलीवुड अभिनेत्री केट विंस्लेट ने टाइटैनिक फ़िल्म में कीमती हीरे तेंज़ानाइट से जड़े आभूषण पहन कर फ़ैशन की दुनिया में इसके इस्तेमाल के रूझान को बढ़ावा दिया था.

आज भारत के जयपुर के हीरे-जवाहरात के उद्योग में लगभग 20 हज़ार लोग कच्चे तेंज़ानाइट से आभूषण बनाते हैं.

लेकिन हाल में तंज़ानिया ने भारत को तेंज़ानाइट का निर्यात बंद कर दिया और इन 20 हज़ार जोहरियों के साथ-साथ अनेक अन्य जो इस व्यापार-कारोबार से जुड़े हैं, उनकी चिंताएँ बढ़ गई हैं.

जानकारों के मुताबिक जयपुर से हर साल कोई 1300 करोड़ रुपए के रंगीन रत्नों का निर्यात किया जाता है और इसमें बड़ा हिस्सा तेंज़ानाइट का होता है.

अफ़्रीकी देश तंज़ानिया की नीति से परेशान रतन-आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद के उपाध्यक्ष राजीव जैन ने कहा, "तंज़ानिया के इस कदम से जयपुर के हीरे जवाहरात कारोबार को बड़ा झटका लगा है. हम भारत सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि इस मुद्दे को तंज़ानिया के साथ बात कर सुलझाया जाए."

जैन अपने व्यपार के सिलसिले में तंज़ानिया जाते रहते है और उस स्थान पर भी कई बार गए हैं जहाँ तंज़ानिया में कलिमनजारो पहाड़ों से ये नीले रंग का पत्थर निकलता है.

उनका कहना है, "मुझे लगता है कि तंज़ानिया के इस फ़ैसले के पीछे घरेलु राजनीति काम कर रही है क्योंकि वहाँ चुनाव होने वाले हैं और कुछ लोगों के दबाव में तंज़ानिया ने वर्ष 2003 में भी तंज़ानिया निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी. मगर उसे बाद में वापस ले लिया गया था."

जानकारों के मुताबिक जयपुर से हर साल कोई 1300 करोड़ रुपए के रंगीन रत्नों का निर्यात किया जा है और इसमें बड़ा हिस्सा तेंज़ानाइट का होता है.

जयपुर के एक रत्न व्यापारी कमल कोठारी कहते हैं, "रत्न पथरों की कटिंग और पोलिशिंग की विधा को कोई एक दिन में विकसित नहीं कर सकता. जयपुर को ये विधा हासिल करने में सदियाँ लग गईं. पीढ़ी दर पीढ़ी लोगों ने इस काम को सीखा है. अगर कहीं के लोग ये समझते हैं कि वो इस कला को चंद दिनों में हासिल कर लेंगे तो ये भूल होगी और द्विपक्षीय नुकसान होगा."

एक और रत्न कारोबारी विजय केडिया कहते हैं कि इससे न केवल बड़े निर्यातकों बल्कि हज़ारों कुशल कारीगर को भी नुक़सान होगा.