युवाओं में बेरोज़गारी 65 साल में सबसे अधिक

बेरोज़गारी (फ़ाइल)
Image caption हर साल बेरोज़गारी दो लाख की दर से बढ़ती है पर 2007-09 में 78 लाख बेरोज़गार थे

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से दुनिया भर के युवाओं में बेरोज़गारी इस साल रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच जाएगी और 15 से 24 साल के बीच के 8.1 करोड़ युवाओं के पास नौकरी नहीं होगी.

संयुक्त राष्ट्र की संस्था विश्व श्रम संगठन (आईएलओ) ने एक सर्वेक्षण के आधार पर कहा है कि दुनिया में आर्थिक मंदी के कारण युवाओं में बेरोज़गारी की दर ज़्यादा उम्र के लोगों के मुकाबले में दो गुना तेज़ी से बढ़ी.

बीबीसी संवाददाता मार्क ग्रेगरी के अनुसार इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि आर्थिक मंदी के कारण दुनिया भर में इस 15 से 24 साल की 'पीड़ित पीढ़ी' के बेरोज़गार होने से व्यापक सामाजिक अस्थिरता का ख़तरा बढ़ गया है.

अधिकतर युवा ग़रीब देशों में

आईएलओ की रिपोर्ट के मुताबिक विकासशील देश सबसे ज़्यादा प्रभावित हुए हैं और वहाँ नौकरी खोने का ख़तरा सबसे अधिक है.

दुनिया में 15 से 24 साल के युवाओं में से 90 प्रतिशत ग़रीब देशों में रहते हैं.

विश्व के अन्य हिस्सों में स्पेन, लात्विया, लिथुआनिया, एस्टोनिया जैसे देश सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं.

ग्लोबल एमप्लॉयमेंट ट्रेंड्स नाम की रिपोर्ट को लिखने वालों में से एक सायरा एल्डर ने संवाददाताओं के बताया, "विश्व श्रम संगठन ने अब तक विश्व में बेरोज़गारी के बारे में जितने आकलन किए हैं उनमें बेरोज़गारों का ये आंकड़ा (8.1 करोड़) सबसे अधिक है...ये लोग सभी तरह की सही शिक्षा-प्रशिक्षण ले रहे हैं लेकिन इनके सामने सभी दरवाज़े बंद हो रहे हैं."

रिपोर्ट के अनुसार, "रोज़गार न पाने से व्यक्ति में किसी काबिल न होने की भावना और निकम्मे होने की भावना बढ़ती है. इससे अपराध, मानसिक रोग, हिंसा, संघर्ष और मादक पदार्थों का इस्तेमाल बढ़ता है."

ऐसा अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2010 में युवाओं में बेरोज़ग़ारी के बढ़ते रहने के आसार हैं.

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