आत्महत्याओं से 32 अरब डॉलर का नुक़सान

प्रधानमंत्री नाओटो कान

जापान के प्रधानमंत्री नाओटो कान ने कहा कि इससे देश में समस्या का पता चलता है

जापान में सरकार का कहना है कि पिछले साल देश में आत्महत्याओं और लोगों के अवसाद से ग्रस्त होनो के कारण अर्थव्यवस्था को 32 अरब डॉलर या 2.7 खरब येन का नुक़सान हुआ.

ये रक़म आय में हुए नुक़सान और लोगों को मिलने वाली चिकित्सा के ख़र्च की है. ऐसा पहली बार हुआ है कि जापान की सरकार ने इस तरह के आंकड़े जारी किए हैं.

जापान में आत्महत्याओं की दर दुनिया में अन्य देशों के मुक़ाबले में काफ़ी अधिक है. पिछले साल वहाँ 32 हज़ार से अधिक लोगों ने ख़ुदकुशी की थी.

प्रधानमंत्री नाओटो कान मानते हैं कि ये आर्थिक संकट के साथ पैदा होने वाले मानसिक तनाव का सबूत है.

सरकार इस समस्य का सामना करने के लिए एक टास्क फ़ोर्स का गठन कर रही है.

जापान में पिछले 12 सालों से लगातार हर साल 30 हज़ार से अधिक आत्महत्याएँ हो रही हैं और इसलिए ये ऐसी समस्या है जिसका समाधान पूरे देश को करना होगा. उम्मीद है कि इस अध्ययन से रोकथाम के उपाए करने की दिशा में पहल होगी

एक सरकारी अधिकारी

शुक्रवार से सरकार अपनी वेबसाइट पर जे-लीग के एक फ़ुटबॉल खिलाड़ी का वीडियो चलाएगी ताकि लोग इस समस्या के बारे में अधिक जागरूक बनें.

'उम्मीद है पहल होगी'

स्वास्थ्य, श्रम और कल्याण मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना था, "जापान में पिछले 12 सालों से लगातार हर साल 30 हज़ार से अधिक आत्महत्याएँ हो रही हैं और इसलिए ये ऐसी समस्या है जिसका समाधान पूरे देश को करना होगा. उम्मीद है कि इस अध्ययन से रोकथाम के उपाए करने की दिशा में पहल होगी."

इस अध्ययन के मुताबिक जिन लोगों ने पिछले साल अपनी ही जान ले ली, यदि वे 15 और 69 वर्ष की आयु के बीच काम करते तो वे 1.9 खरब येन कमाते.

साथ ही जो लोग अवसाद का शिकार हुए, यदि वे इलाज के लिए छुट्टी न लेते तो 109 अरब येन कमाते. इसके अतिरिक्त उन्हें बेरोज़गारी भत्ता और अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएँ देने पर भी सरकार ने ख़र्च किया.

कान ने कहा है कि ये आत्महत्याएँ इस बात का संकेत हैं कि देश में क्या समस्या है.

अनेक वृद्ध लोग मानसिक रोग को एक धब्बे के रूप में देखते हैं और मानते हैं कि इस पर केवल और प्रयास के साथ विजय पाई जा सकती है.

अवसाद के इलाज में मनोवैज्ञानिक तरीके और मानसिक चिकित्सा तकनीकों के इस्तेमाल में जापान यूरोप और उत्तर अमरीका से काफ़ी पीछे हैं और जापान में अधिकतर डॉक्टर कई बार केवल दवा को ही इस बीमारी का इलाज मानते हैं.

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