आउटसोर्सिंग पर ओहायो के फ़ैसले का विरोध

भारत का सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र

भारत में इस उद्योग से क़रीब 30 लाख लोगों को रोज़गार मिलता है.

सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में आउटसोर्सिंग पर प्रतिबंध के फ़ैसले को लेकर अमरीकी राज्य ओहायो की आलोचना हो रही है. भारत सरकार और नैसकॉम ने इस मुद्दे को अमरीका ले जाने की बात कही है.

भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी इंडस्ट्री ने ओहायो के नए विधेयक को भेदभाव करने वाला बताया है.

अमरीकी प्रांत ओहायो के विधेयक में सूचना प्रौद्योगिकी की परियोजनाओं में आउटसोर्सिंग पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है. यानी ओहायो की सरकारी प्रौद्योगिकी सूचना या उससे जुड़े किसी और काम के लिए भारतीय पेशेवरों को नहीं लिया जाएगा.

नैसकॉम और भारत सरकार दोनों ने इसका विरोध किया है और कहा है कि वे अमरीकी सरकार से इस बारे में बात करेंगे.

अमरीका जाएगी आवाज़

विदेशों को भारतीय पेशेवरों या प्रोफ़ेशनल्स की सेवाएं देने वाली कंपनी नैसकॉम ने इस फ़ैसले की कड़ी आलोचना की है.

नैसकॉम यानी ( नेशनल एसोसिएशन ऑफ़ सॉफ़्टवेयर एंड सर्विस कंपनीज़) ने ओहिया के इस क़दम को चुनावी नारा करार दिया है क्योंकि ये बात उस वक़्त कही गई है जब नवंबर में अमरीकी कांग्रेस और ओहायो के गवर्नर पद के लिए चुनाव नज़दीक आ रहे हैं.

ये चुनावी नारा है क्योंकि ये बात उस वक़्त कही गई है जब नवंबर में अमरीकी कांग्रेस और ओहायो के गवर्नर पद के लिए चुनाव नज़दीक आ रहे हैं.

नैसकॉम

नैसकॉम की तरफ़ से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है, "ओहायो का ये प्रतिबंध देखकर यही लगता है कि अमरीका में चल रहे राजकीय घाटे को कम करने के लिए ये फ़ैसला किया गया है. लेकिन इससे अमरीकी नागरिकों पर कर का बोझ बढ़ेगा."

नैसकॉम का कहना है कि इस तरह बाहर से रोज़गार लेने पर प्रतिबंध किसी भी देश की केंद्र सरकार ही लगा सकती है क्योंकि ये मामला अंतरराष्ट्रीय कारोबार की श्रेणी में आता है. इसलिए नैसकॉम एक राज्य द्वारा पारित किए गए विधेयक की वैधता को भी परख रहा है.

इस महीने के आख़िर में नैसकॉम अपना एक दल अमरीका लेकर जा रहा है. कुछ उपयुक्त अधिकारियों के साथ मिलकर नैसकॉम इस मुद्दे को अमरीका में उठाने वाला है.

नैसकॉम की कोशिश है कि इस मुद्दे पर उन्हें उद्योग और वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा का सहयोग भी मिल जाए जो उस दौरान अमरीका में ही होंगे.

वादा तोड़ा?

भारत सरकार ने ओहायो के इस फ़ैसले का विरोध किया है.

सरकार का कहना है कि पिछले महीने ओहायो के गवर्नर टेड स्ट्रिकलैंड का इस तरह का प्रतिबंध लगाने का आदेश जी-20 देशों के बीच हुए वादे का उल्लंघन है.

दरअसल पिछले महीने ओहायो के गवर्नर टेड स्ट्रिकलैंड ने एक सरकारी आदेश में सरकारी सूचना प्रौद्योगिकी और उससे जुड़े दूसरे काम के लिए बाहर से लोगों की नियुक्ति पर प्रतिबंध लगाया था. ताकि राज्य में रोज़गार को बढ़ावा मिल सके.

अमरीका में बेरोज़गारी की दर 10 फ़ीसदी के आसपास पहुंच रही है. बेरोज़गारी की ये हालत देखते हुए अमरीका में बाहर से रोज़गार मंगाने के ख़िलाफ़ कई आवाज़ें उठ रही हैं.

ऐसे में अब ये माना जा रहा है कि एक राज्य के प्रतिबंध लगाने के बाद आने वाले दिनों में बाक़ी राज्य भी ऐसा ही क़दम उठा सकते हैं.

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिबंध के ख़िलाफ़ भारत के मुद्दों को अमरीका में वज़न मिल सकता है.

इसका आधार ये है कि जी-20 में आर्थिक मंदी से निपटने के लिए संरक्षणवाद को हटाने को लेकर हुए फ़ैसले पर दोनों ही देशों की रज़ामंदी हुई थी.

इस पर ये तर्क कि ओहायो का फ़ैसला एक राज्य का अपना फ़ैसला है, कारोबार संबंधी द्वीपक्षीय बातचीत के सामने ठहर नहीं पाएगा.

उल्लेखनीय है कि भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग लगभग 60 अरब डॉलर का उद्योग है. ये अपने लगभग 60 प्रतिशत राजस्व के लिए अमरीका पर निर्भर है. भारत में इस उद्योग से क़रीब 30 लाख लोगों को रोज़गार मिला हुआ है.

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