वृद्ध होती जनसंख्या से संकट

चीन के कुछ वृद्ध लोग

दुनिया के ज़्यादातर देशों में बड़ी संख्या में लोग वृद्ध हो रहे हैं जिसका सीधा असर अपरिहार्य तौर पर पेंशन और वृद्धों की सहायता करने वाली दूसरी योजनाओं पर पड़ने वाला है.

बीबीसी के आर्थिक संवाददाता एंड्रयू वॉकर का कहना है कि इसके पीछे दो प्रकार के रुझान काम कर रहे हैं. पहला जो कि सुखद है और वह ये है कि लोगों की ज़िंदगी लंबी हो रही है, वे पहले के मुक़ाबले अब ज़्यादा दिनों जी रहे हैं.

वर्ष 1960 में पैदा हुए बच्चों के बारे में यह अनुमान लगाया जाता था कि वह औसतन 52 साल तक ज़िंदा रहेंगे. आज यह आंकड़ा 69 साल हो चुका है. और इस सदी के मध्य तक यह 70 से ऊपर पहुंच जाएगा.

दूसरी तरफ़ लोग बच्चे कम पैदा कर रहे हैं. 1960 में हर 1000 व्यक्ति पर 33 बच्चे होते थे और आज यह संख्या घट कर 20 हो गई है. अनुमान लगाया जाता है कि यह संख्या और नीचे जाएगी क्योंकि विकासशील देशों में लोगों में कम बच्चे पैदा करने का रुझान बढ रहा है.

यह भी अच्छी ख़बर है क्योंकि इस प्रकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जनसंख्या का संतुलन बरक़रार रहेगा यानी आज से बेहतर संतुलन होगा.

बहरहाल कुछ देशों में एड्स के कारण लोगों की औसत आयु में कमी आई है और यह बात दक्षिणी अफ्रीकी देशों में ख़ास तौर से देखी जा रही है.

लेकिन इसका आम स्वरूप ये है कि लंबी आयु और कम बच्चे.

जनसंख्या के इस नए स्वरूप ने नई समस्याएं पैदा की हैं. जिसके मुताबिक़ हर वृद्धों के अनुपात में कमाने वाले कम हो गए हैं.

संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक़ 1950 में आठ प्रतिशत जनसंख्या 60 वर्ष से ऊपर थी. आज यह 11 प्रतिशत है और इस सदी के मध्य तक यह 22 प्रतिशत हो जाएगी. जापान मकाओ और दक्षिण कोरिया में तो यह प्रतिशत 40 तक पहुंच जाएगा.

चीन की स्थिति

चीन में अभी 16 करोड़ 70 लाख लोग 60 वर्ष या उससे ऊपर की आयु में हैं और 2050 तक यह संख्या 40 करोड़ तक पहुंच जाएगी. इसका मतलब ये हुआ कि चीन की लगभग एक चौथाई आबादी वृद्धों की होगी.

चीन में बच्चे पैदा करने पर कंट्रोल के कारण यह स्थिति पैदा हुई है. 30 साल पहले के मुक़ाबले जन्मदर में एक तिहाई की गिरावट आई है.

जिसका अर्थ ये हुआ कि देश की बूढ़ी होती आबादी की देखभाल के लिए कम जवान लोग बचेंगे.

शंघाई फ़ुडान यूनिवर्सिटी के जनसंख्या विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर पेंग ज़ीजे़ ने कहा, "आने वाल 20 वर्षों में हमें एक प्रकार के पेंशन संकट का सामना होगा. हम लोग संकट नहीं चाहते. लेकिन हमें इसके लिए वाक़ई कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी क्योंकि समय निकलता जा रहा है."

जीवन के लिए नृत्य

Image caption मौत के डर से चीन के बूढ़े नृत्य कर रहे हैं.

दूसरी ओर स्थिति ये है कि बूढ़े लोग केंद्रीय शंघाई के एक पार्क में पॉप गीतों पर नृत्य कर रहे हैं. उन लोगों ने काफ़ी अच्छा समय देख लिया है. उनका देश अमीर होता जा रहा है और उनके जीवन काल में वृद्धि हो रही है.

यहां नियमित रूप से इसमें भाग लेनेवाली 58 वर्षीय टियान ज़िया का कहना है, "बूढे लोग इसलिए नाचते हैं कि वह मरने से डरते हैं और यही कारण है कि वह स्वस्थ रहने के लिए डांस करते हैं."

बीबीसी संवाददाता मार्टिन सेरीन का कहना है कि चीन में बूढे होना हमेशा ऐसा ही निर्मल नहीं रहेगा क्योंकि देश की जनता बड़ी संख्या में बूढ़ी हो रही है.

चीन में वैसे भी पेंशन का इंतिज़ाम या तो बहुत कम है या है ही नहीं. शहर और गांव में अलग अलग तरीक़े हैं.

चीन की सरकार फ़िलहाल इस व्यवस्था में सुधार पर काम कर रही है. लेकिन प्रोफ़ेसर पेंग का कहना है कि इनकी संख्या इतनी ज़्यादा है कि सरकार से बस के बाहर है.

उन्होंने कहा कि चीन को बुज़ुर्गों की देखभाल के लिए सरकारी, पारिवारिक और अन्य संस्थानों के कई स्तर पर व्यवस्था करनी होगी.

बुज़ुर्गों का ध्यान

परंपरागत तौर पर चीन में नौजवान बूढों का ख़्याल रखते हैं. 22 वर्षीय यान युनयिंग उनमें से एक है. वह एक वित्त कंपनी में काम करती है और अपने दादा-दादी का ख़्याल रखती है और अपने पिता की अपनी मां की देख-भाल में मदद करती है. उसकी मां को कैंसर है.

वो कहती हैं, "पूरे घर की देखभाल करना और फिर एक ब्यॉय फ़्रेंड तलाश करना काफ़ी मुश्किल काम है."

उनका कहना है, "मुझ पर दबाव बढ़ता जा रहा है. लेकिन यह मेरी ज़िम्मेदारी है इसलिए मैं काम और परिवार में संतुलन बनाने की कोशिश करती हूं."

उनका कहना है कि उनके कुछ दोस्तों के लिए यह दबाव बर्दाश्त के बाहर हो रहा है.

लोगों से भरे शहर शंघाई में यह समस्या काफ़ी गंभीर है. शहर का हर पांचवा आदमी रिटायरमेंट की उम्र को पहुंच गया है.

जो पहले कभी नहीं सुना गया था यानी रिटायरमेंट घर खुलने लगे हैं जिनमें से एक चेरिश यार्न घर है जो शहर के बाहर सारे ऐशो आराम से भरा है.

यहां स्विमिंग पूल है, बड़ा सा जिम है और दूसरी तरह की सुविधाएं हैं घर जैसे माहौल और कई तालाब का दावा है.

इसके मालिक जी ज़ियॉंग का कहना है, "बुज़ुर्गों की देखभाल के लिए ज़बर्दस्त मार्केट है क्योंकि वृद्धों की संख्या में ज़बर्दस्त वृद्धि हो रही है और उनके देखभाल की मांग बढ़ रही है."

लेकिन ये घर और सहूलतें तो अमीरों और अभिजात वर्ग का हिस्सा हैं दूसरे लोगों को तो दर्दनाक फ़ैसले लेने होंगे.