भारत-चीन के छात्रों से चुनौती: ओबामा

बराक ओबामा
Image caption ओबामा ने छात्रों से पढ़ाई में कठिन परिश्रम की सलाह दी है.

अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा है भारत और चीन से मिल रही चुनौती को देखते हुए अमरीकी बच्चों को अपना लक्ष्य और ऊंचा बनाना चाहिए जिससे अमरीका 21वीं सदी में सफलता हासिल कर सके.

उन्होंने कहा कि भारत और चीन के छात्र पहले की तुलना में अधिक मेहनत कर रहे हैं.

बराक ओबामा अपना दूसरा 'बैक टू स्कूल' भाषण देने फिलेडेल्फिया की यात्रा पर गए थे. पिछले साल ओबामा ने वर्जिनिया में भाषण दिया था इसकी कंजरवेटिव पार्टी ने यह कहते हुए आलोचना की थी कि बच्चों के दीमाग में राजनीतिक बातें नहीं भरी जानी चाहिए.

प्रेरक भाषण

पैनसेल्वेनिया के एक स्कूल में मंगलवार को छात्रों को संबोधित करते हुए ओबामा ने कहा,''आपका खुद के प्रति एक दायित्व है और अमरीका का एक दायित्व था कि आपको हर संभव बेहतर शिक्षा दी जाए.''

उन्होंने कहा, ''आज जिस तरह से ये देश हमसे प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं, वैसा पहले कभी नहीं हुआ, जब दुनिया भर के छात्र चीन और भारत में कटिन परिश्रम कर रहे हैं, पहले की तुलना में अच्छा कर रहे हैं, आप की सफलता से केवल आपकी ही सफलता सुनिश्चित होने नहीं जा रही है, यह 21वीं सदी में अमरीका की सफलता भी सुनिश्चित करने जा रही है.''

मास्टरमैन प्रयोगशाला और प्रदर्शन स्कूल में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए ओबामा ने कहा, ''यह सुनिश्चित करने के लिए आपको वैसी शिक्षा मिल सके, हम मिलकर काम करने जा रहे हैं.''

उन्होंने कहा,''आपका भाग्य कोई और नहीं लिखेगा बल्कि आप खुद लिखेंगे. आपका भविष्य आपके हाथ में है.''

उन्होंने कहा, ''आपका जीवन वैसा ही है जैसा कि आप बनाते हैं. इसके अलावा कुछ नहीं...बिल्कुल कुछ नहीं है. यह आपकी पहुँच से बाहर नहीं है. आप जितना बड़ा सपना देखें, उतना ही अधिक आप कठिन परिश्रम करेंगे. उतना ही अधिक आप अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करेंगे.''

उनुशासन का पाठ

उन्होंने कहा,''आप जो भी कर रहे हैं उसमें आपको अपना सर्वश्रेष्ठ देना होगा. उस तरह का अनुशासन, उस तरह की प्रेरणा, उस तरह का कठिन परिश्रम, सफलता के लिए बहुत ज़रूरी है.''

अपना उदाहरण देते हुए ओबामा ने कहा, ''मैं हमेशा अनुशासित नहीं था. जब मैं युवा था तो मैं अच्छा विद्यार्थी नहीं था. मैंने भी ग़लतियाँ कीं. हाई स्कूल में अपनी माँ के साथ की गई एक बातचीत मुझे अभी भी याद है. मैं एक मूर्ख की तरह था.''

उन्होंने कहा, ''अंतत: मेरी की बातों का मुझपर प्रभाव पड़ा और मैं अपनी पढ़ाई को लेकर गंभीर हुआ.इसके बाद मैंने अपनी सबी कामों में प्रयास करना शुरू किया. इसके बाद मुझे अपने ग्रेड और संभावनाओं में सुधार नज़र आया.''

ओबामा ने कहा, ''मैं जानता हूँ कि अगर कठिन परिश्रम मेरे अंदर सुधार ला सकता है तो यह आप सबके अंदर बदलाव ला सकता है.''

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