आरबीआई ने ब्याज दरें बढ़ाईं

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Image caption आरबीआई ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में इस साल चौथी बार वृद्धि की है.

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने मौद्रिक नीति की समीक्षा करते हुए गुरुवार को रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में बढ़ोतरी करने की घोषणा की है.

रेपो रेट में 0.25 फ़ीसदी और रिवर्स रेपो दर में 0.50 फ़ीसदी की बढ़ोतरी की गई है.

अर्थशास्त्र की भाषा में रेपो रेट वो दर है जिसपर आरबीआई बैंकों को कम अवधि के लिए उधारी देता है. बैंक जब आरबीआई में अपना पैसा जमा करते हैं और आरबीआई उन्हें जिस दर से ब्याज देता है वह रिवर्स रेपो रेट कहलाता है.

इसके बाद रेपो रेट बढ़कर छह फ़ीसदी और रिवर्स रेपो रेट बढ़कर पाँच फ़ीसदी हो गया है. नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं.

महँगाई पर क़ाबू पाने के लिए

आरबीआई के इस क़दम को बेकाबू होती महँगाई पर काबू पाने का प्रयास माना जा रहा है. लेकिन कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि इससे बाज़ार में पैसे की सप्लाई घटेगी और आम लोगों के लिए क़र्ज लेने की ब्याज दर भी बढ़ सकती है.

मध्य मार्च के बाद से अब तक आरबीआई इन दरों में चार बार बढ़ोतरी कर चुका है.

आरबीआई का कहना है कि बढ़ती महँगाई उसकी प्रमुख चिंता है. उसका मानना है कि यह वृद्धि विकास दर को प्रभावित नहीं करेगी.

भारत में अगस्त महीने में थोकमूल्य सूचकांक साढ़े आठ फ़ीसदी दर्ज किया गया जबकि जुलाई में यह 9.8 फ़ीसदी था.

अपने प्रमुख क़र्ज़ की दरों में आरबीआई ने मार्च से लेकर अब तक एक फ़ीसदी तक की बढ़ोतरी की है. बैंक का अनुमान है कि अर्थव्यवस्था सही रास्ते पर जा रही है और विकास दर साढ़े आठ फ़ीसदी रहने का अनुमान है.

यह पहली बार हुआ है कि आरबीआई ने छह हफ़्ते पर अर्थव्यवस्था की समीक्षा करनी शुरू की है. इस समीक्षा के आंकड़े गुरुवार को जारी किए गए.

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