एशिया बनेगा विकास का इंजन:आईएमएफ़

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा है कि वैश्विक आर्थिक मंदी में उबरने में एशिया अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा जिसमें भारत और चीन का नाम शामिल है.

आईएमएफ़ ने गुरुवार को 2010 के लिए एशिया आर्थिक रिपोर्ट जारी की.

आईएमएफ़ ने ये भी आगाह किया है कि अगर पश्चिमी देशों में लंबे समय तक हालात ख़राब रहते हैं तो एशिया पर भी इसका असर पड़ेगा.

संस्था का कहना है कि एशियाई देशों को बढ़ती महंगाई पर नज़र रखनी होगी और ये भी देखना होगा कि उनके बाज़ार में बाहर से कितना पैसा आ रहा है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत, चीन, इंडोनेशिया में तेज़ गति से विकास होता रहेगा और तीनों देश एशिया को मंदी से उबरने में मदद करेंगे. लेकिन साथ ही कहा गया है कि अगर विकसित देशों में हालात खराब रहे तो एशिया के लिए हालात चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं.

आगाह

पश्चिमी देशों का कहना है कि उनकी अर्थव्यवस्था अभी तक मंदी से पूरी तरह उबर नहीं पाई है क्योंकि चीन अपनी मुद्रा युआन को रिवेल्यु नहीं कर रहा है.

इन देशों के मुताबिक इस बात का मतलब ये है कि चीन के उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सस्ते पड़ते हैं और इस कारण पश्चिमी कंपनियों को अपने उत्पाद बेचने में मुश्किल होती है.

अमरीका और यूरोप ने चीन से आग्रह किया है कि वो अपनी मुद्रा को रिवेल्यु करे. कहा जा रहा है कि दक्षिण कोरिया में होने वाली जी-20 की बैठक में इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस होने वाली है.

आईएमएफ़ में एशिया निदेशक अनूप सिंह का कहना है कि सभी देशों को हल निकालने के लिए मिलकर काम करना होगा.

अपनी रिपोर्ट में आईएमएफ़ ने आगाह किया है कि एशियाई बाज़ार में काफ़ी पैसा आ रहा है जिस कारण महंगाई बढ़ सकती है और विकास की रफ़्तार कम हो सकती है.

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