जी-20 बैठक: मुद्रा विनिमय मुख्य मुद्दा

Image caption चीन पर अमरीका ने ख़ासा दबाव डाला है कि वो युआन को और लचीला बनाए लेकिन फ़िलहाल इसके आसार नहीं दिख रहे.

दुनिया के बीस देशों के संगठन जी-20 के वित्त मंत्रियों और मुख्य बैंकों की दो दिनों की बैठक शुक्रवार से दक्षिण कोरिया में शुरु हो गई है.

हालांकि बैठक के तय मुद्दे आर्थिक मंदी से जुड़े बैंक सुधार और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोश में बदलाव जैसे विषय है लेकिन माना जा रहा है कि मुद्रा विनिमय पर चल रहा आपसी तनाव इसमें हावी रहेगा.

कोरिया के राष्ट्रपति ने कहा है कि इस मुद्दे पर समक्षौते की कोशिश की जानी चाहिए लेकिन संवाददाताओं का कहना है कि इसपर किसी तरह के सुलह की कोई गुंजाइश नहीं है.

बैठक के लिए वहां पहुंचे भारतीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि उन्हें कम उम्मीद है इस मामले पर कोई समझौता हो पाएगा.

उनका कहना था, "इस समय ये काफ़ी मुश्किल लग रहा है लेकिन हम फिर भी बात कर रहे हैं."

कई विकासशील देश अपनी मुद्रा के बढ़ते वज़न को लेकर चिंतित हैं क्योंकि इससे उनके निर्यात पर सीधा असर पड़ता है.

विकसित अर्थव्यवस्थाओं में इन दिनों ब्याज दर बहुत नीचे है और वहां के निवेशक बेहतर मुनाफ़े के लिए उभरती अर्थव्यवस्थाओं में पैसा लगा रहे हैं जिससे इन अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं और ज़्यादा मजबूत हो रही हैं.

लेकिन चीन अपनी मुद्रा युआन पर दबाव को कम रखने के लिए और ज़्यादा डॉलर खरीद कर रहा है जिससे उसकी मुद्रा दूसरी मुद्राओं की तुलना में कमज़ोर रहे.

निर्यात मंहगा

चीनी मुद्रा कमज़ोर रहती है तो दूसरे देशों के लिए ये मुश्किल पैदा करती है क्योंकि उनका माल चीन के मुक़ाबले मंहगा हो जाता है.

उभरती और संपन्न अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी-20 में इसी बात की मांग हो रही है कि चीन अपनी मुद्रा को कमज़ोर रखने के लिए जो कदम उठा रहा है वो बंद करे और युआन को और लचीला बनाए.

Image caption चीन की सरकार युआन के मूल्य को कम रखने के लिए और ज़्यादा डॉलर खरीद रही है.

अमरीका ने ख़ासतौर से इसके लिए चीन पर ख़ासा दबाव डाला है.

लेकिन निकट भविष्य में चीन की ओर से कोई कदम उठाया जाएगा इसके आसार नहीं दिख रहे.

ब्याज दर

मुद्रा विनिमय पर तनाव की दूसरी वजह है संपन्न देशों में ब्याज दर का कम होना.

आर्थिक मंदी से उबरने की कोशिश कर रहे इन देशों में भी इस बात के आसार कम ही हैं कि वो जल्द ही ब्याज दर में बढ़ोतरी करेंगे.

बीबीसी के आर्थिक विश्लेषक एंड्रयू वाकर का कहना है कि आसार इस बात के हैं कि अमरीका और ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक मंदी से उबरने के लिए और कदम उठाएंगे जिससे की ब्याज दर और नीचे जा सकता है.

इसके परिणामस्वरूप वहां के निवेशक उभरती अर्थव्यवस्थाओं में और पैसा लगाना जारी रखेंगे और वहां की मुद्राओं की ताक़त और बढ़ती रहेगी और साथ ही बढ़ेगा तनाव भी.

शुक्रवार से शुरू होनेवाली जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों की दो दिनों की बैठक की सबसे बड़ी चुनौती होगी इस समस्या के लिए एक बीच का रास्ता निकालना.

फ़िलहाल लग ऐसा रहा है कि इन वित्त मंत्रियों को इसके लिए काफ़ी संघर्ष करना पड़ेगा.

संबंधित समाचार