चिंता के बीच जी-20 की बैठक

 युआन
Image caption चीनी मुद्ना युआन के घटते मूल्य पर अमरीका और चीन में तनातनी भी है

जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक दक्षिण कोरिया में हो रही है. उनकी बातचीत में मुद्रा मूल्यों पर चिंताएं हावी हैं.

बीबीसी संवाददाता एंड्रयू वाकर का कहना है कि इस मसले पर किसी तरह की प्रगति की संभावना कम ही है.

एक लंबे समय से अमरीका की शिकायत रही है कि चीन की युआन नीति से अमरीका में नौकरियों का संकट पैदा हो गया है. जी-20 में इस बात की मांग हो रही है कि चीन अपनी मुद्रा को कमज़ोर रखने के लिए जो कदम उठा रहा है वो बंद करे और युआन को और लचीला बनाए.

अमरीका ने ख़ासतौर से इसके लिए चीन पर ख़ासा दबाव डाला है. लेकिन निकट भविष्य में चीन की ओर से कोई कदम उठाया जाएगा इसके आसार नहीं दिख रहे.

अमरीका के वित्त मंत्री टिम गिथनर ने इस बैठक में प्रस्ताव रखा है कि ट्रेड सरप्लस को राष्ट्रीय आय के चार फ़ीसदी तक रखा जाए. रूस, जर्मनी और सऊदी अरब जैसे जी-20 के देश अमरीका के इस रुख का समर्थन कर रहे हैं.

विकासशील देशों की चिंता

कई विकासशील देश अपनी मुद्रा के बढ़ते वज़न को लेकर चिंतित हैं क्योंकि इससे उनके निर्यात पर सीधा असर पड़ता है.

विकसित अर्थव्यवस्थाओं में इन दिनों ब्याज दर बहुत नीचे है और वहां के निवेशक बेहतर मुनाफ़े के लिए उभरती अर्थव्यवस्थाओं में पैसा लगा रहे हैं जिससे इन अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राएं और ज़्यादा मजबूत हो रही हैं.

लेकिन चीन अपनी मुद्रा युआन पर दबाव को कम रखने के लिए और ज़्यादा डॉलर खरीद कर रहा है जिससे उसकी मुद्रा दूसरी मुद्राओं की तुलना में कमज़ोर रहे.

चीनी मुद्रा कमज़ोर रहती है तो दूसरे देशों के लिए ये मुश्किल पैदा करती है क्योंकि उनका माल चीन के मुक़ाबले मंहगा हो जाता है.

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