भारत- जापान के बीच व्यापार समझौता

मनमोहन सिंह और नाओतो कान
Image caption भारत और जापान के बीच सीमा शुल्क की कटौती का समझौता

भारत और जापान के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने वाले एक समझौते पर हस्ताक्षर हो गए हैं. भारतीय प्रधानमंत्री जापान के दौरे पर हैं.

समझौते के तहत कई चीज़ों के आयात और निर्यात पर लगने वाले सीमा शुल्क में भारी कटौती होगी और दोनों देशों के लिए एक दूसरे के बाज़ार और खुल जाएंगे.

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने बयान में कहा, "ये एक ऐतिहासिक उपलब्धि है जो एशिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग का संकेत है. इससे व्यापार के नए अवसर पैदा होंगे और दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश के प्रवाह में भारी वृद्धि होगी".

ये समझौता जापान के लिए भी बहुत महत्व रखता है क्योंकि वह व्यापार के क्षेत्र में दक्षिण कोरिया से पिछड़ता जा रहा है.

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और जापान के प्रधानमंत्री नाओतो कान के बीच आर्थिक साझेदारी के इस समझौते को प्रभावी होने के लिए जापान की संसद की स्वीकृति आवश्यक है जो अगले साल के मध्य तक संभव है.

जापान और भारत इतनी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं फिर भी दोनों के बीच इस साल के पहले छ महीनों में कोई 7.7 अरब डॉलर का व्यापार हुआ है जबकि इसी अवधि में चीन के साथ जापान का व्यापार 176 डॉलर का हुआ.

भारत के साथ हुए समझौते से चीनी बाज़ार पर जापान की निर्भरता कुछ कम हो जाएगी विशेष रूप से ऐसे समय जब दोनों देशों के बीच कुछ द्वीपों को लेकर विवाद चल रहा है.

परमाणु सहयोग की आशा

भारत के प्रधानमंत्री ने अपने वक्तव्य में भारत और जापान के बीच उच्च तकनीक के व्यापार के विस्तार की भी चर्चा की.

उन्होने कहा, "मैं आशा करता हूं कि ऐसे व्यापार के लिए जापान अपने निर्यात नियंत्रण नियमों को आसान बनाएगा. हम असैनिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में जापान सरकार के भारत से सहयोग करने के निर्णय का भी स्वागत करते हैं".

दोनों देशों के बीच परमाणु सहयोग पर अभी सहमति नहीं बन पाई है.जापान ने जून के महीने में परमाणु समझौते की संभावना पर बातचीत शुरु की थी लेकिन जापान के लिए ये एक संवेदनशील विषय है क्योंकि भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया है.

जापान एकमात्र देश है जिसने परमाणु बम हमले की विभीषिका झेली है इसलिए जापान में परमाणु हथियार विरोधी भावना बड़ी प्रबल है.

जब जापान के विदेशमंत्री कत्सूया ओकाडा अगस्त में भारत आए थे तो उन्होंने भारत को और परमाणु परीक्षण न करने के लिए आगाह किया था.

वैसे भारत ने परमाणु परीक्षण स्थगित करने की घोषणा कर रखी है लेकिन जापान भारत से अधिक स्पष्ट प्रतिबद्धता चाहता है.

भारत और जापान के बीच परमाणु समझौता बहुत महत्वपूर्ण है तभी परमाणु संयंत्र बनाने वाली अंतरराष्ट्रीय कम्पनियां भारत के साथ व्यापार कर सकेंगी.

अमरीका स्थित जीई-हिताची न्यूक्लियर ऐनर्जी और वैस्टिंगहाउस इलैक्ट्रिक जो तोशिबा कॉरपोरेशन की सहायक कम्पनी है भारत में परमाणु संयंत्र लगाने का इंतेज़ार कर रही हैं लेकिन जब तक भारत और जापान के बीच समझौता नहीं हो जाता वो ऐसी नहीं कर सकतीं क्योंकि कुछ ख़ास कल-पुर्ज़े जापानी कम्पनियों से आते हैं.

भारत ने 1974 में जब पहला परमाणु परीक्षण किया था और परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया था तो उस पर परमाणु व्यापार प्रतिबंध लग गया था.

लेकिन 2008 में अमरीका के साथ असैनिक परमाणु सहयोग समझौता हो जाने के बाद स्थितियां बदलीं और 45 सदस्यों वाले न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रूप ने परमाणु व्यापार पर से प्रतिबंध हटा लिया.

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