जी20 सम्मेलन पर मुद्रा विवाद का साया

जी20 सम्मेलन
Image caption सम्मेलन पर अमरीका और चीन के बीच मुद्रा और व्यापार असंतुलन का मुद्दा हावी रह सकता है.

मुद्रा विवाद के साए में दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच दक्षिण कोरिया की राजधानी सिओल में हो रहे जी20 सम्मेलन का आज दूसरा दिन है.

ये डर जताया जा रहा है कि जी20 सम्मेलन चीन और अमरीका के बीच व्यापरिक असंतुलन और 'मुद्रा यूद्ध' में उलझ कर रह जाएगा.

सम्मेलन में कई देशों ने अमरीका के अपनी अर्थव्यवस्था में 600 बिलियन डॉलर डालने के फ़ैसले की भी आलोचना की है.

सम्मेलन शुरू होने से पहले अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने जी20 मुल्क़ों से दुनिया की अर्थव्यवस्था की बहाली के लिए एकजुट होने का आहवान किया था.

सिओल में एक प्रेस वार्ता में ओबामा ने कहा है कि जी20 सम्मेलन के आख़िर में जारी की जाने वाली विज्ञप्ति में संतुलित और दीर्घकालीन अंतरराष्ट्रीय आर्थिक समृद्धि की रूपरेखा शामिल होगी.

अमरीका बनाम चीन

ग़ौरतलब है कि चीन और अमरीका में चीनी मुद्रा यूआन के मूल्यांकन को लेकर भारी मतभेद हैं. साथ ही अमरीका चीन के ट्रेड सरप्लस से भी ख़ुश नहीं हैं.

अमरीका का मत रहा है कि चीन जानबूझ कर अपनी मुद्रा को कमज़ोर रखता है ताकि उसे निर्यात में फ़ायदा हो.

कुछ अमरीकी आलोचक चाहते हैं कि उनके देश में चीनी आयात पर और कर लगने चाहिएं ताकि चीनी मुद्रा यूआन थोड़ी महंगी हो पाए.

ताज़ा आंकड़ों के अनुसार चीन की ट्रेड सरप्लस देश के आर्थिक प्रगति की रफ़्तार के कम होने के बावजूद अक्तूबर माह में 27 अरब अमरीकी डॉलर हो गया है. चीन के व्यापारिक सरप्लस की वजह उसकी मुद्रा यूआन का कमज़ोर होना बताया जाता है जिससे चीनी निर्यातकों को सहायता मिलती है.

चीन पश्चिम देशों के इस मत से सहमत नहीं है.

तनाव का माहौल

बीबीसी से बातचीत में विश्व बैंक के अध्यक्ष रॉबर्ट ज़ोएलिक ने कहा है कि मुद्रा के मूल्यांकन को लेकर 'निश्चित रूप से तनाव' है.

ज़ोएलिक ने कहा, "आपको इस तनाव से बचना होगा क्योंकि आप संरक्षणवाद की ओर नहीं बढ़ना चाहते."

राष्ट्रपति ओबामा पर भी अपने देश को समृद्धि की राह पर लौटाने के लिए डॉलर को कमज़ोर करने का आरोप लगता रहा है.

बराक ओबामा सम्मेलन के दौरान अपने दो सबसे बड़े आलोचकों,चीनी राष्ट्रपति हू जिनताओ और जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल से अलग-अलग और अकेले में बातचीत करने वाले हैं.

ओबामा कहते रहे हैं कि आर्थिक मंदी से बाहर निकलने के लिए देशों को निर्यात का सहारा लेना होगा लेकिन उनके इस विचार से कुछ नेता असहमत हैं.

ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने कहा है कि आर्थिक विकास दर बढ़ाने के लिए निर्यात पर निर्भर करने के परिणाम गंभीर हो सकते हैं. ब्राज़ील के राष्ट्रपति ने कहा, "अगर अमीर देश स्वयं उपभोग नहीं करेंगे और सिर्फ़ निर्यात का ही दांव खेलेंगे तो दुनिया कंगाल हो जाएगी."

इसीबीच अमरीका और दक्षिण कोरिया ने घोषणा की है कि दोनों देश सम्मेलन से पहले हुई बातचीत में मुक्त व्यापार समझौते पर सहमत नहीं हो पाए हैं.

दोनों देशों के बीच ये समझौता तीन साल से विचाराधीन था लेकिन अमरीका में दक्षिण कोरिया के बाज़ार में कुछ वस्तुओं के प्रवेश को लेकर चिंताओं की वजह से आगे प्रगति नहीं हो पाई थी.

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