अब 65 लाइसेंस रद्द करने का सुझाव

Image caption कुछ कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने लाइसेंस की शर्तों को पूरा नहीं किया.

भारतीय टेलीकॉम नियामक प्राधिकरण ने 2 जी स्पेक्ट्रम के 127 आवंटित लाइसेंस में से 65 को रद्द करने का सुझाव दिया है. उनका कहना है कि इन कंपनियों ने वादे के अनुसार नेटवर्क शुरु नहीं किए हैं.

यूपीए सरकार 2G स्पेक्ट्रम घोटाले को लेकर पहले से ही संसद में जूझ रही है.

गुरूवार को भी प्रधानमंत्री से इस मामले पर जवाब मांग रही विपक्षी पार्टियों ने संसद में हंगामा किया और दोनो सदनों की कार्यवाही दिन भर के लिेए स्थगित हो गई.

समाचार एजेंसी पीटीआई और अन्य मीडिया सूत्रों के अनुसार अब 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर टेलीकॉम नियामक प्राधिकरण यानि ट्राई ने दूरसंचार मंत्रालय से सिफा़रिश की है कि 2008 में 2 जी स्पेक्ट्रम के जो 127 लाइसेंस कंपनियों को दिए गए थे उनमें से कम से कम 65 लाइसेंसों को रद्द किया जाना चाहिए.

प्राधिकरण का कहना है कि लाइसेंस पाने वाली इन कंपनियों ने करार के मुताबिक अपने टेलीकॉम नेटवर्क शुरू नहीं किए हैं या फिर करार के मुताबिक सेवाएं शुरू नहीं की हैं.

नई कंपनियां

कहा जा रहा है कि जिन लाइसेंसों के रद्द किए जाने की सिफ़ारिश की गई है उनमें से ज़्यादातर टेलीकॉम के क्षेत्र में पहली बार उतरने वाली कंपनियां हैं.

Image caption विपक्ष ने इस मामले पर प्रधानमंत्री की चुप्पी को बड़ा मुद्दा बनाया है.

इन कंपनियों पर यह भी आरोप हैं कि इन्होंने लाइसेंस पाने के बाद भारी मुनाफ़े पर अपने शेयर फ़ौरन ही विदेशी कंपनियों को बेच दिए और ये कंपनियां उन मापदंडों को भी पूरा नहीं करती थी जिनकी दूरसंचार मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार ज़रूरत थी.

ट्राई का कहना है कि इससे कई टेलीकॉम सर्कल में स्पेक्ट्रम ख़ाली होगा जिसे उन कंपनियों को दिया जा सकता है जो मंत्रालय की शर्तें पूरी कर सकती हैं.

अनियमितता और घोटालों के आरोपों के बाद ए राजा को दूरसंचार मंत्री के पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा है और मानव संसाधन मंत्री और क़ानून विशेषज्ञ कपिल सिब्बल को इस मंत्रालय का अतिरिक्त भार सौंपा जा चुका है.

वैसे कपिल सिब्बल पर यह बंदिश नहीं है कि वो ट्राई के सुझावों को स्वीकार करें लेकिन वो मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस पर चर्चा कर रहे हैं.

'प्रधानमंत्री जवाब दें'

उधर, विपक्ष अभी भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर दबाव डाल रहा है कि वो इस बात का जवाब दें कि वो पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा के फ़ैसलों पर 11 महीने तक चुप्पी क्यों साधे रहे.

यूपीए ने अभीतक विपक्ष की ये शर्त नहीं मानी है.

अब शुक्रवार को इस मुद्दे पर सरकार को कैसे घेरा जाए इस पर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के नेता लाल कृष्ण आडवाणी के घर बैठक के बाद अरुण जेटली ने कहा कि सरकार विपक्ष से यह उम्मीद ना करे कि वो इस चुप्पी को बर्दाश्त कर लेगी.

अरुण जेटली का कहना था कि ए राजा पर लगे आरोपों के बावजूद उन्हें दूरसंचार मंत्री पद पर बने रहने देना दिखाता है कि यूपीए सरकार ने अपने अस्तित्व के लिए राष्ट्रीय हितों की अनदेखी की और अब सरकार इस पर जवाब दे.

वहीं प्रधानमंत्री निवास स्थान पर भी कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने विपक्ष के हमलों का जवाब देने की रणनीति बनाने के लिए चर्चा की है.

सुप्रीम कोर्ट में भी 2 जी स्पेक्ट्रम के मामले पर सुनवाई चल रही है और सरकार के सामने संसद और अदालत दोनों ही जगह मुश्किल सवाल खड़े हो रहे हैं.

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