स्वदेश धन भेजने में भारतीय आगे

दिलीप राठा
Image caption डॉक्टर दिलीप राठा विश्व बैंक की इस रिपोर्ट को तैयार करने वालों में से एक हैं.

विदेशों में रह रहे भारतीय अब भी पहले की ही तरह सबसे ज़्यादा धन स्वदेश में रह रहे अपने परिजनों को भेज रहे हैं. ये जानकारी विश्व बैंक की ‘माइग्रेशन ऐंड रेमिटेंसेज़ फ़ैक्टबुक 2011’ नामक रिपोर्ट से सामने आई है.

विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2009 में भारतीयों ने विदेशों से 49.6 अरब डॉलर वापस अपने देश को भेजे थे. वर्ष 2010 में ये राशि बढ़कर 55 अरब डॉलर हो गई है.

विदेशों से अपने वतन धन वापस भेजने वालों में भारत के बाद चीनी प्रवासियों का स्थान है. चीन अप्रवासियों ने इस वर्ष 51 अरब डॉलर की राशि को वापस अपने परिजनों को भेजा है.

दिलचस्प बात ये है कि वर्ष 2010 में विश्व भर में कुल विप्रेषित धन का एक चौथाई हिस्सा भारत या चीन में गया है.

अप्रवासन

Image caption वर्ष 2010 में भारतीय अप्रवासियों ने 55 बिलियन डॉलर वापस भारत भेजे

इसी रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि मैक्सिको के बाद सबसे ज़्यादा अप्रवासन भारतीय ही करते हैं.

अप्रवासन की श्रेणी में भारत के बाद रुस, चीन, यूक्रेन, बांग्लादेश और पाकिस्तान आते हैं.

विश्व बैंक की 'फ़ैक्टबुक' के अनुसार वर्ष 2010 में विश्व भर कुल 21 करोड़ 50 लाख लोग अपना देश छोड़कर दूसरे देश में गए.

अमरीका अब भी अपना देश छोड़कर जाने वालों के लिए चहेती जगह बना हुआ है. विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2010 में चार करोड़ 28 लाख लोगों ने अमरीका का रुख़ किया.

इस बड़े आंकड़े की तुलना में केवल 22 लाख अमरीकी ही अपना देश छोड़कर बाहर गए.

विश्व बैंक की इस रिपोर्ट से एक दिलचस्प बात ये सामने आई है कि एशिया में अपना मुल्क़ छोड़ने वालों के लिए भारत अमरीका के बाद दूसरी पसंद है.

फ़ैक्टबुक के अनुसार भारत में 61 लाख लोग आए जिनमें से अधिकतर बांग्लादेश, नेपाल और पाकिस्तान से हैं.

‘माइग्रेशन ऐंड रेमिटेंसेज़ फ़ैक्टबुक 2011’ का संकलन विश्व बैंक के दिलीप राठा, संकेत महापात्रा और अनी सिलवाल ने किया है.

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