'रेअर अर्थ्स' के निर्यात में कटौती

Image caption रेअर अर्थ्स इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल उत्पादों में इस्तेमाल होते हैं

चीन ने 'रेअर अर्थ्स' खनिजों के निर्यात में अगले साल 10 प्रतिशत कटौती करने की घोषणा की है. इन खनिजों का मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों में इस्तेमाल होता है.

इसके अलावा कई इलेक्ट्रिकल उत्पादों, विंड टरबाइन और अत्याधुनिक हाइब्रिड कारों में भी रेअर अर्थ्स का उपयोग होता है.

दुनिया के रेअर अर्थ्स व्यवसाय के 97 प्रतिशत पर इस समय चीन का नियंत्रण है. दूसरी अमरीका ने पिछले साल इन खनिजों का नाममात्र भी उत्पादन नहीं किया था.

इसीलिए चीन के निर्यात में कटौती की ख़बर आते ही ऑस्ट्रेलिया की उन दो कंपनियों के शेयरों में 10 प्रतिशत से ज़्यादा का उछाल आ गया जो रेअर अर्थ्स के खनन की योजना बना रही हैं.

चीन के वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि पर्यावरणीय चिंताओं के कारण सरकार ने न सिर्फ़ रेअर अर्थ्स खनिजों के निर्यात की मात्रा कम करने का, बल्कि उनके खनन और उत्पाद की गति पर भी ब्रेक लगाने का फ़ैसला किया है.

जटिल और महंगी उत्पाद प्रक्रिया

रेअर अर्थ्स आवर्त सारणी में 17 रासायनिक तत्वों को सामूहिक रूप से कहा जाता है, जिनमें परमाणु संख्या 57 से 71 के बीच वाले लैंथेनाइड तत्वों के अलावा स्कैंडियम(परमाणु संख्या 21) और इटरियम(परमाणु संख्या 39) शामिल हैं.

रेअर अर्थ्स तत्व धरती पर प्रचूर मात्रा में उपलब्ध हैं लेकिन ये बिखरे होते हैं, यानि सामान्य अयस्कों की तरह एक जगह प्राप्त नहीं होते हैं. इनकी उत्पादन प्रक्रिया भी बेहद जटिल होती है.

पिछले दिनों जापान को चीन से इन खनिजों का निर्यात बाधित हुआ था तो जापान के अलावा कई पश्चिमी देशों ने भी इस पर चिंता व्यक्त की थी.

कई विशेषज्ञों की राय है कि जापान के साथ समुद्री सीमा को लेकर भड़के विवाद के बाद चीन ने जानबूझ कर कुछ दिनों के लिए आपूर्ति बाधित किया था. हालाँकि चीन ने हमेशा इन आरोपों से इनकार किया है.

रेअर अर्थ्स की सप्लाई के मुद्दे पर अमरीका पहले ही चीन के ख़िलाफ़ विश्व व्यापार संगठन का दरवाज़ा खटखटाने का संकेत दे चुका है.

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