सिटीबैंक के अधिकारियों के ख़िलाफ़ मामला

विक्रम पंडित
Image caption बैंक का कहना है कि शीर्ष अधिकारियों के ख़िलाफ़ कोई मामला ही नहीं बनता

सिटी बैंक की गुड़गाँव शाखा में हुई करोड़ों रुपए के घोटाले के मामले में बैंक के सीईओ विक्रम पंडित, चेयरमैन विलियम आर रोड्स सहित ग्यारह शीर्ष अधिकारियों के ख़िलाफ़ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज की गई है.

गुड़गाँव के ही पुलिस स्टेशन में यह रिपोर्ट संजीव अग्रवाल ने दर्ज करवाई है. वे हेलियन एडवाइज़र्स नाम की कंपनी के प्रबंध निदेशक हैं. उनका कहना है कि इस घोटाले में उनके भी 30 करोड़ रुपए डूब गए हैं.

उन्होंने इन अधिकारियों के ख़िलाफ़ विश्वास तोड़ने और धोखाधड़ी के आरोप लगाए हैं.

इसके अतिरिक्त कई अन्य लोगों ने शिकायत की है कि उनकी जानकारी के बिना उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

बैंक के अधिकारियों का कहना है कि बैंक के ही अधिकारी शिवराज पुरी ने कुछ निवेशकर्ताओं को एक फ़र्ज़ी निवेश योजना के ज़रिए भारी भरकम राशि निवेश करने के लिए प्रेरित किया.

इस राशि को उन्होंने अपने और तीन रिश्तेदारों के नाम से खोले गए संयुक्त खाते में जमा करवा लिया.

फिर इस राशि को उन्होंने कथित तौर पर शेयर बाज़ार सहित अन्य स्थानों पर निवेश कर दिया.

हालांकि बैंक यह नहीं बता रही है कि कुल कितनी राशि का घोटाला हुआ है लेकिन कहा जा रहा है कि यह राशि सौ करोड़ से भी अधिक हो सकती है.

रिपोर्ट दर्ज

यह मामला पिछले हफ़्ते सामने आया था.

कहा जा रहा है कि इसमें बड़ी संख्या में धनी लोगों को चपत लगी है.

आर्थिक नुक़सान के शिकार संजीव अग्रवाल ने यह पुलिस में शिकायत दर्ज की है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार एक बयान में उन्होंने कहा है, "मेरी बचत की राशि के नुक़सान से मैं परेशान हूँ और मुझे लगता है कि यह सिटी बैंक की जवाबदेही है कि वह मेरे पैसे वापस लौटाए."

उन्होंने कहा है, "सिटी बैंक एक प्रतिष्ठित बहुराष्ट्रीय बैंक है, हमने अपने जीवन भर की बचत के साथ इस पर भरोसा किया लेकिन बैंक और उसके अधिकारियों की ओर से की गई एक ग़ैरक़ानूनी कारगुज़ारी की वजह से वह राशि चली गई है."

Image caption बैंके ने अभी तक यह नहीं बताया है कि कुल धांधली कितनी राशि की हुई है

उनका कहना है कि ऐसा नहीं हो सकता कि इतना बड़ी धोखाधड़ी बैंक के शीर्ष अधिकारियों की जानकारी के बिना नहीं हो सकती.

गुड़गाँव के पुलिस कमिश्नर एसएस देसवाल ने कहा है, "हमें जैसे ही शिकायत मिली हमने रिपोर्ट (एफ़आईआर) दर्ज कर ली है."

उन्होंने कहा, "सभी अधिकारियों के ख़िलाफ़ आपस में एक दूसरे के साथ मिलकर षडयंत्रपूर्वक ज्ञात या अज्ञात लोगों के साथ मिलकर 32.43 करोड़ रुपए की राशि का ग़बन करने का मामला दर्ज किया गया है."

इस बीच इस धोखाधड़ी के शिकार हुए कई प्रभावशाली लोगों ने शिकायत की है कि उनकी जानकारी के बिना उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे इन शिकायतों की जाँच कर रहे हैं.

इस मामले में पुलिस कथित रुप से धोखाधड़ी करने वाले बैंक के अधिकारी शिवराज पुरी को पहले ही गिरफ़्तार कर चुकी है.

हालांकि शिवराज पुरी का कहना है कि उन्होंने कोई धोखाधड़ी नहीं की है.

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