‘अर्थव्यवस्था बढ़ती रहेगी, ख़तरे बरकरार’

विश्व बैंक का कहना है कि इस वर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुधार की रफ़्तार कम लेकिन ठोस रहेगी.

अपने वार्षिक आकलन में बैंक ने इस बात को लेकर आगाह भी किया है कि कई अमीर देशों में चल रहा आर्थिक संकट विश्व में अर्थव्यवस्था में हो रहे सुधार पर असर डाल सकता है.

विश्व बैंक ने अपने आकलन में कहा है कि ज़्यादातर विकासशील देशों में आर्थिक गतिविधियों ने वही रफ़्तार पकड़ ली है जैसी गति मंदी न आने की सूरत में होनी चाहिए थी.इस साल इन देशों में विकास दर अमीर देशों से ज़्यादा रहने का अनुमान है.

बैंक का कहना है कि विकासशील देशों में बढ़ती माँग के बल पर विश्व अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है..यानी ये देश बिक्री के लिए अमीर देशों पर निर्भर नहीं है.

मंदी से उबरने के रास्ते में बैंक ने कई ख़तरों के प्रति सावधान भी किया है- ख़ासकर विकसित देशों में बैंकिंग प्रणाली में आ रही समस्याएँ.

ख़तरे भी हैं

बैंक ने ये भी कहा है कि विकासशील देशों में तेज़ी से बढ़ते विदेशी निवेश से भी मुश्किल खड़ी हो सकती है.अधिकतर देशों में इस विदेशी निवेश से आर्थिक प्रगति में मदद मिली है.

लेकिन बैंक को लगता है कि इस निवेश की वजह से विकासशील देशों में संपत्ति की क़ीमतों में ज़बरदस्त उछाल आ सकता है या बाज़ार में मुद्रा की क़ीमत अचानक बढ़ सकती है जिससे प्रतिस्पर्धा का माहौल बिगड़ता है.

कई विकासशील देशों की सरकारें इन ख़तरों को लेकर पहले ही चिंता जता चुकी हैं.मुद्रा विनिमय दर को लेकर विभिन्न देशों में नोकझोक भी चलती रही है और इसे मुद्रा युद्ध तक का नाम दिया जा रहा है.

मोटे तौर पर विश्व बैंक की रिपोर्ट ने मुख्यत अर्थव्यवस्था की सकारात्मक रुप रेखा दी है पर साथ ही ये रिपोर्ट ख़तरों के प्रति भी लोगों को फिर से आगाह करती है.

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