सड़कें बनाने के लिए डेढ़ अरब डॉलर देगा विश्व बैंक

भारत का बाज़ार
Image caption विश्व बैंक का कहना है कि सड़कें बेहतर बनने से बाज़ार जाना आसान हो जाएगा

विश्व बैंक ने भारत की ग्रामीण सड़क योजना में डेढ़ अरब डॉलर निवेश के एक समझौते पर दस्तख़त किए हैं जिसकी वजह से ग्रामीण इलाक़ों में रहने वाले साठ लाख से ज़्यादा लोगों को फ़ायदा पहुँचेगा.

ग्रामीण मार्ग परियोजना में अब तक का सबसे बड़ा निवेश करते हुए विश्व बैंक के समूह अध्यक्ष रॉबर्ट बी ज़ोएलिक ने कहा कि इस समझौते के बाद मूल ढाँचा मज़बूत होगा और यह भारत के ग्रामीण इलाक़ों की बेहतरी की दिशा में एक अहम क़दम साबित होगा.

इस मौक़े पर वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि भारत सरकार ने वर्ष 200 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत की थी और आज इस की बदौलत ग्राणीण इलाक़ों में तीन लाख किलोमीटर सड़कों का निर्माण हो चुका है.

उन्होंने कहा, "लेकिन अब भी कुछ पर्वतीय इलाक़े और आर्थिक रूप से पिछड़े क्षेत्रों तक इसका फ़ायदा नहीं पहुँच पाया है. इस कार्यक्रम के तहत 40 अरब डॉलर और ख़र्च किए जाने की योजना है और उसमें विश्व बैंक का योगदान अहम भूमिका अदा करेगा".

चौबीस हज़ार किलोमीटर सड़कें

विश्व बैंक के अनुदान को हिमाचल प्रदेश, झारखंड, मेघालय, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में 24 हज़ार किलोमीटर से अधिक लंबी सड़कों के निर्माण में ख़र्च किया जाएगा.

Image caption रॉबर्ट ज़ोएलिक ने इस समझौते को एक अहम क़दम बताया है

इन सड़कों के निर्माण और रखरखाव के लिए ग्रामीण इलाक़ों में तीन करोड़ शिफ़्ट होंगी और 20 हज़ार से अधिक इंजीनियरों, ठेकेदारों और कुशल-अकुशल कारीगरों को प्रशिक्षित किया जाएगा.

विश्व बैंक के अध्यक्ष का कहना है, "सड़कें न केवल बाज़ार तक पहुँच सुलभ बना कर लोगों की आजीविका बढ़ाने का एक माध्यम हैं बल्कि शिक्षा का स्तर भी बढ़ाती हैं क्योंकि अध्यापकों और छात्रों के लिए हर मौसम में स्कूल पहुँचना संभव हो जाता है".

समझौते पर भारत की ओर से वित्त मंत्रालय में आर्थिक मामलों के संयुक्त सचिव वेणु राजामणि और विश्व बैंक की तरफ़ से भारत के लिए निदेशक रॉबर्टो जाघा ने हस्ताक्षर किए.

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