विकास दर नौ प्रतिशत रहेगी: आर्थिक सर्वेक्षण

भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने वर्ष 2011-12 के आर्थिक सर्वेक्षण में भारत की विकास दर का अनुमान लगभग नौ प्रतिशत रहने की बात कही है.

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया, जिसके अनुसार कृषि क्षेत्र में विकास दर 5.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है.

ग़ौरतलब है कि पिछले साल के आर्थिक सर्वेक्षण में अर्थव्यवस्था की विकास दर आठ प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था जबकि आर्थिक विकास दर 8.6 प्रतिशत रही है.

वित्तीय घाटे पर सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया है कि घाटा सकल घरेलु उत्पाद का 7.3 प्रतिशत रहने की संभावना है.

आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि बचत और निवेश और निजी ख़र्च में वृद्धि के कारण सकल घरेलु उत्पाद में 9.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है (वर्ष 2010-11 की मार्किट कीमत पर).

साथ ही बचत की दर में 33.7 प्रतिशत वृद्धि हुई है और पूँजी निवेश की दर 36.5 प्रतिशत बढ़ी है.

सर्वेक्षण के मुताबिक 2010-11 में औद्योगिक उत्पाद की विकास दर 8.6 प्रतिशत रही है जबकि निर्माण क्षेत्र में विकास दर 9.1 प्रतिशत रही है.

आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक निर्यात में 29.5 प्रतिशत वृद्धि हुई है जबकि आयात में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने शुक्रवार को संसद में आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया और

ग़ौरतलब है कि पिछले साल के आर्थिक सर्वेक्षण में अर्थव्यवस्था की विकास दर आठ प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था.

आर्थिक सर्वेक्षण में एक ओर महँगाई पर चिंता जताई गई है वहीं सुधारों में गति लाने और सीधे विदेशी पूँजी निवेश का स्तर बढ़ाने पर ज़ोर दिया गया है.

इससे पहले प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद और विश्व बैंक ने कहा था कि भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर फिर नौ प्रतिशत तक पहुँच जाएगी जो वर्ष 2008-09 में पैदा हुए वित्तीय संकट से पहले थी.

उधर महँगाई के मुद्दे पर रिज़र्व बैंक के गवर्नर जी सुब्बाराव ने कहा है कि अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखते हुए बैंक किसी भी समय अपनी नीतियों में परिवर्तन कर सकती है.

उनका कहना था, "तिमाही और तिमाही के दौरान आर्थिक नीतियों पर पुनर्विचार के अलावा, हम अर्थव्यवस्था की बदलती स्थिति के मुताबिक किसी भी समय नीतियों में बदलाव कर सकती है."

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