रेल बजट से है बाज़ार चिंतित

बाज़ार की मानें तो शुक्रवार को पेश किया गया रेल बजट ममता बनर्जी ने बंगाल के चुनावों को ध्यान में रखकर बनाया था, हालांकि कोशिश की गई थी हर प्रदेश को कुछ न कुछ देने की.

साथ ही चिंता ये है कि रेल मंत्री ने इतनी घोषणाएं तो कर दी हैं लेकिन इन सबके के लिए धन कहाँ से आएगा.

ऐसा लगता है कि रेल बजट से बाज़ार को भारी निराशा ही हुई है और इसका सुबूत रेल स्टॉक्स पर भी दिखा.

कालिंदी रेल निर्माण (इंजीनियर्स), टीटागढ़ वैगंस, बीईएम, केर्नेक्स माईक्रोसिस्टम्स इंडिया और टेक्सामको जैसी कंपनियों के स्टॉक्स नीचे लुढ़क गए.

दोपहर साढ़े तीन बजे के आसपास कालिंदी के शेयर्स 13 प्रतिशत से ज़्यादा नीचे चले गए, टीटागढ़ के शेयर 13 प्रतिशत लुढ़के, टेक्समाको में करीब आठ प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई जबकि केर्नेक्स माइक्रोसिस्टम्स के शेयर करीब पाँच प्रतिशत नीचे गए.

लेकिन टीटागढ़ वैगंस के एमडी उमेश चौधरी मानते हैं कि बाज़ार की ऐसी प्रतिक्रिया शायद इसलिए हो क्योंकि ममता बनर्जी के भाषण में यात्रियों को लेकर बहुत बातें कही गईं, और इस बारे में काफ़ी कम बातें कहीं गईं कि धन कैसे जुटाया जाएगा.

लेकिन उमेश चौधरी ये भी कहते हैं कि बाज़ार में ज़रूरत से ज़्यादा प्रतिक्रिया हुई है, और उन्हें कोई कारण नहीं दिखता कि ऐसी प्रतिक्रिया हो.

पैसा कहां से आएगा?

उधर कंपनियों के गुट ऐसोचैम का कहना था कि मुसाफ़िरों की सुरक्षा के लिए कुछ और कदम उठाए जाने चाहिए थे.

ऐसोचैम अध्यक्ष दिलीप मोदी का कहना था कि ये साफ़ नहीं है कि नई फ़ैक्टरियों और रेल नेटवर्क के फ़ैलाव के लिए धन कहां से इकट्ठा किया जाएगा.

Image caption बाज़ार का कहना है कि ममता बनर्जी का रेल बजट पश्चिम बंगाल के चुनावों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है.

उनका कहना था कि बजट का ध्यान लोगों के कल्याण पर ज़्यादा था, न कि बिज़नेस सेक्टर को कुछ और देने पर.

कालिंदी रेल निर्माण के वित्त प्रमुख एपी वर्मा ने बीबीसी से बातचीत में बजट को सकारात्मक बताया लेकिन उनके मुताबिक उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि उनकी कंपनी के स्टॉक नीचे क्यों चले गए, हालांकि वो बहुत कुछ ज़्यादा बोलने को तैयार नहीं थे.

उधर उमेश चौधरी मानते हैं कि ममता बनर्जी की राजनीतिक मजबूरियाँ थीं, लेकिन वो यात्री किराए में कोई भी बढ़ोतरी नहीं किए जाने से सहमत नहीं हैं.

उनका कहना था, “सालों से पैसेंजर किराए को जो सब्सिडी मिलती रही है, उसे कम करने की ज़रूरत है.. माल किराया को बढ़ाकर पैसेंजर किराए को सब्सिडी दी जाती रही है. ये लंबे समय तक नहीं चल सकता.”

उन्होंने कहा, “एक तरफ़ छठे वेतन आयोग के लागू होने से रेलवे वित्त पर दबाव बढेगा. कई सामाजिक प्रोजेक्टों पर भी काम चल रहा है. और इन सबके बाद पैसेंजर किराए को इतनी ज़्यादा सब्सिडी दी जा रही है. एक वक्त के बाद इस नीति में बदलाव लाना होगा. दूसरी ओर अगर फ़ैक्टरियाँ लगाने की वजाए, पैसा मूल भूत सुविधाओं पर खर्च किया जाता तो शायद ज़्यादा बेहतर रहता.”

उधर फ़ेडरेशन ऑफ़ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइज़ेशन के अध्यक्ष रामू एस देवरा ने माल भाड़े में कोई भी वृद्धि नहीं होने पर खुशी ज़ाहिर की.

उनका कहना था, “ऐसा होने से सामान के आयात-निर्यात में होने वाले खर्चे नियंत्रण में रहेंगे. हालांकि उनके मुताबिक अगर भारतीय रेल की बैलेंस शीट को देखा जाएगा तो उसे 57,630 करोड़ के प्रस्तावित खर्च से निपटने के लिए और धन जुटाने के तरीकों की ओर देखना होगा.”

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