जी-7 के हस्तक्षेप से स्थिर हुआ येन

जापानी मुद्रा
Image caption जापान ने येन की क़ीमत में आई तेज़ी के लिए सटोरियों को ज़िम्मेदार ठहराया है

विश्व की सात मज़बूत अर्थव्यवस्थाओं के समूह जी-7 के हस्तक्षेप के फ़ैसले के बाद जापानी मुद्रा येन डॉलर के मुक़ाबले सस्ता हो गया है, जिसका असर जापान के शेयर बाज़ार में भी देखने को मिला है.

जापान के निक्केई सूचकांक ने शुक्रवार को खुलने के कुछ ही घंटो में 2.7 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की और 9,206.75 के अंक तक पहुंच गया.

मुद्रा बाज़ार में जापानी मुद्रा की क़ीमत 81.70 के आसपास रही.

इस हफ्ते के दौरान येन की क़ीमत 76.25 तक पहुंच गई थी, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से डॉलर के मुक़ाबले येन का सबसे मंहगा स्तर है.

अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में येन के मंहगे होने से इस बात की आशंका जताई जा रही थी कि वो जापान की अर्थव्यवस्था की बहाली को कमज़ोर कर देगी.

महंगे येन का मतलब है विश्व बाज़ार में जापान का सामान और महंगा होगा और ज़ाहिर है लोग दूसरे देशों से निर्यात किए जाने वाले सस्ते माल को जापान के माल की तुलना में ज़्यादा तरजीह देंगें.

येन की क़ीमत में आई भारी बढ़ोतरी के बाद जी-7 देशों ने तय किया था कि वो संगठित तौर पर मुद्रा बाज़ार में हस्तक्षेप कर येन की क़ीमत को क़ाबू करने की कोशिश करेंगें.जापान भी इस समूह का सदस्य एक है.

जी-7 ने एक बयान में कहा कि येन की क़ीमत में दर्ज की जा रही अस्थिरता विश्व अर्थव्यवस्था के लिए भारी ख़तरा है.

सटोरिये ज़िम्मेदार

जापान ने येन की क़ीमतों में हुई तेज़ी के लिए सटोरियों को ज़िम्मेदार ठहराया है.

जापान में आए भयंकर भूकंप और सुनामी के बाद निवेशकों को लगा था कि अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए जापान को विदेश में मौजूद अपनी सम्पत्ति को देश वापस लाना पड़ेगा.

बैंक और बीमा कंपनियां ने लोगों के दावों की पूर्ति के लिए ऐसा करना शुरु कर दिया है.

इस बीच अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतें एक बार गिरने के बाद फिर से तेज़ हो रही है.

गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 1.59 डॉलर बढ़ कर 103.98 पर पहुंच गया था.

जापान तेल का बहुत बड़ा उपभोक्ता है और वहां आई तबाही के बाद ऐसा लग रहा था कि जापान में तेल का आयात अपेक्षाकृत कम हो जाएगा.

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