खाद्य पदार्थों के दामों का विकास पर असर

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Image caption एडीबी की रिपोर्ट के अनुसार खाद्य पदार्थों के बढ़ते दाम का विकास दर पर असर पड़ेगा

एशियाई विकास बैंक या एडीबी का कहना है कि खाद्य पदार्थों और ईंधन के चढ़ते दामों की वजह से एशियाई देशों के विकास पर असर पड़ सकता है.

एडीबी ने अपनी रिपोर्ट में ये चेतावनी दी है कि खाद्य पदार्थों और ईंधन के दाम लगातार बढ़ रहे हैं जिससे इस क्षेत्र का आर्थिक विकास इस साल 1.5 प्रतिशत घट सकता है.

बैंक का कहना है कि कई एशियाई देशों में इस साल खाद्य पदार्थों के दामों में औसत 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

मध्य पूर्व के देशों में चल रहे राजनीतिक संकट के कारण तेल के दाम भी बहुत चढ़ गए हैं.

एडीबी ने कहा है कि इन दोनों वजहों से एशियाई अर्थव्यवस्थाओं को भारी झटका लगा है.

घोर दरिद्रता

ये सच है कि एशियाई देश दुनिया पर आए वित्तीय संकट से और मज़बूत होकर उबरे हैं लेकिन महंगाई इस क्षेत्र के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है.

एडीबी ने चेतावनी दी है कि खाद्य पदार्थों के दामों में हुई वृद्धि करोड़ों लोगों को घोर दरिद्रता की ओर धकेल सकती है.

बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री चंगयॉंग री का कहना है, "विकासशील एशियाई देशों के ग़रीब परिवार अपनी आमदनी का 60 प्रतिशत खाने पर ख़र्च करते हैं लेकिन महंगाई की वजह से अब वो चिकित्सा और बच्चों की शिक्षा पर ख़र्च नहीं कर पाएंगे".

"अगर इसपर लगाम नहीं लगाई गई तो ये संकट एशिया में ग़रीबी घटाने की दिशा में अब तक हुई प्रगति को कमज़ोर करेगा".

निर्यात पर प्रतिबंध

एशियाई विकास बैंक ने ये चेतावनी भी दी है कि खाद्य पदार्थों के दाम कुछ समय के लिए अस्थिर बने रहेंगे.

बैंक ने कहा कि खाद्य पदार्थों के दाम बढ़ने के कई कारण हैं. कुछ देशों में ख़राब मौसम के कारण उत्पादन में गिरावट आई है. इसके अलावा अमरीकी डॉलर के कमज़ोर पड़ने और ईंधन के दाम बढ़ने का भी असर हुआ है.

इन कारणों से कई देशों ने अपने उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है जिससे स्थिति और बिगड़ गई है.

डॉ री ने कहा, "इस गहराते संकट से उबरने के लिए ज़रूरी है कि खाद्य पदार्थों पर निर्यात प्रतिबंध न लगाए जाएं और सामाजिक सुरक्षा के तंत्र को मज़बूत किया जाए".

"खाद्य उत्पादों को स्थिर करने के प्रयासों पर ध्यान दिया जाए और कृषिगत ढांचे में और निवेश किया जाए जिससे फ़सलों में बढ़ोतरी हो और भंडारण सुविधाओं का विस्तार हो".

बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री चंगयॉंग री ने ये भी कहा कि इससे खाद्य उत्पाद बरबाद नहीं होंगे और खाद्य संकट पर लगाम लगाई जा सकेगी.

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