अमरीकी घाटे पर चीन की चिंता

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अमरीका और चीन के बीच सोमवार से उच्च स्तरीय बैठक शुरु हो रही है जिसमें आर्थिक और रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा होगी.

बैठक में 16 अमरीकी सरकारी एजेंसियों और 20 चीनी सरकारी विभागों के अध्यक्ष हिस्सा लेंगे जिस दौरान कई जटिल मुद्दों पर विचार विमर्श किया जाएगा जिसमें युआन की विनिमय दर, संरक्षणवाद, अमरीका का बजट घाटा और चीन में मानवाधिकारों का मुद्दा शामिल है.

चार महीने पहले ही अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ के बीच द्विपक्षीय बातचीत हुई थी.

सोमवार से शुरु होने वाली बैठक से किसी बड़े नतीजे की उम्मीद नहीं की जा रही है. बल्कि दोनों पक्षों को उम्मीद है कि वे अपना पक्ष ज़ोरदार तरीके से रख पाएँगे.

इस अहम बैठक को देखते हुए दोनों ओर से कई विवादित मुद्दों पर हाल फ़िलहाल में बयानों का सिलसिला तेज़ हुआ है.

अमरीका में सबसे प्रभावशाली व्यापारिक संगठन- अमरीकी चैंबर ऑफ़ कॉमर्स का कहना है कि उसे सबसे ज़्यादा चिंता इस बात की है कि चीन के विशाल बाज़ार तक अमरीकी व्यापारियों की पहुँच कम है.

शिकायत है कि चीन में बिज़नेस करना पाँच साल पहले के मुकाबले और भी मुश्किल हो गया है.

अमरीका के वाणिज्य मंत्री गैरी लॉके ने कहा है कि चीन में अमरीकी कंपनियों को या तो काम नहीं करने दिया जाता या फिर बाज़ार तक पहुँच बनाने के लिए उन्हें अपनी तकनीक साझा करनी पड़ती है.

चीन की शिकायतें

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वहीं चीन की अपनी शिकायतें हैं. उसका कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा की आड़ में अमरीका चीनी निवेश पर पाबंदी लगाता है.

सोमवार की बैठक में आर्थिक मुद्दों पर बातचीत की अध्यक्षता अमरीका के वित्त मंत्री टिमोथी गाइथनर और चीन के उप प्रधानमंत्री वैंग ओईशान करेंगे. वहीं रणनीतिक मसलों पर बातचीत में अमरीका की विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन शामिल रहेंगी.

टिमोथी गाइथनर ने कहा है कि वो चीन पर मुद्रा नीति को लेकर ज़ोर डालेंगे. इस मुद्दे को लेकर अमरीका और चीन के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं.

चीन ने बार-बार कहा है कि युआन का मूल्य बढ़ाने की अपील का कोई फ़ायदा नहीं होगा.

अमरीका की शिकायत है कि चीन जानबूझकर अपनी मुद्रा की दर कम रखता है ताकि चीन के निर्यातकों को फ़ायदा पहुँच सके.

वहीं चीन की नज़र अमरीका के बढ़ते बजट घाटे पर लगी हुई है. चीन ने अमरीका से कई बार कहा है कि वो सरकारी कर्ज़ के स्तर और डॉलर की मज़बूती को लेकर चीन की चिंताओं को दूर करे. चीन अमरीका का सबसे बड़ा कर्ज़दाता है.

अनुमान लगाया जा रहा है कि अमरीका में फ़ेंड्रल घाटा इस साल 1.4 ट्रिलियन हो जाएगा.

इस वजह से चीन जैसे देशों में ख़ासी चिंता है क्योंकि उसने अमरीकी ट्रेज़री बॉंड और अन्य चीज़ों में भारी निवेश किया है.

ओबामा प्रशासन ने कहा है कि व्यापारिक मुद्दों के अलावा चीन-अमरीका बातचीत में चीन के मानवाधिकार मुद्दों का मामला भी उठाया जाएगा.

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